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पूर्व आईटी कमिश्नर और डीआईजी पत्नी की बढ़ीं मुश्किलें: कमाई से 57% ज्यादा निकली संपत्ति, सीबीआई को क्या मिला?
Thu, 17 Sep 2026 12:56 AM IST
राकेश कुमार
एएनआई, हैदराबाद।
एएनआई, हैदराबाद।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 17 Sep 2026 12:56 AM IST
सार
सीबीआई ने हैदराबाद के पूर्व आयकर आयुक्त जीवनलाल लाविडिया और उनकी पत्नी व पूर्व सीआईएसएफ डीआईजी शिप्रा श्रीवास्तव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। जांच के अनुसार, अधिकारी ने 2022 से 2025 के बीच अपनी ज्ञात आय से 57.10% (लगभग 1.11 करोड़ रुपये) अधिक संपत्ति जुटाई। 9 मई 2025 की छापेमारी में 54 लाख रुपये नकद और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए थे, जिसके बाद सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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सीबीआई
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इनकम टैक्स विभाग के पूर्व कमिश्नर और उनकी सीआईएसएफ अधिकारी पत्नी पर सीबीआई का शिकंजा कस गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व इनकम टैक्स कमिश्नर (छूट) हैदराबाद, जीवनलाल लाविडिया और उनकी पत्नी व तत्कालीन डीआईजी, सीआईएसएफ, शिप्रा श्रीवास्तव के खिलाफ केस दर्ज किया है। दोनों अधिकारियों पर अपनी कमाई के आधिकारिक जरियों से कहीं ज्यादा संपत्ति जमा करने का गंभीर आरोप लगा है।
सीबीआई की जांच में क्या निकलकर आया सामने?
केंद्रीय जांच एजेंसी की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी-III), नई दिल्ली ने इस मामले में 10 सितंबर को औपचारिक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। सीबीआई के मुताबिक, एक अप्रैल 2022 से 10 मई 2025 की जांच अवधि के दौरान जीवनलाल लाविडिया ने पद पर रहते हुए अवैध तरीके से अकूत संपत्ति हासिल की। दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि उनके पास मौजूद कुल चल-अचल संपत्ति उनकी वैध आय के मुकाबले 57.10 प्रतिशत अधिक पाई गई है।
अवैध कमाई का पूरा हिसाब-किताब क्या?
आय और खर्च का अंतर: सीबीआई के गणित के अनुसार, तय समय में अधिकारी की कुल वैध आय 1,95,74,358 रुपये थी, जबकि इसी दौरान उनका कुल खर्च और खरीदी गई संपत्तियां 3,07,52,247 रुपये तक पहुंच गईं।
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अघोषित संपत्ति का आंकड़ा: जांच एजेंसी ने गणना के बाद पाया कि अधिकारी और उनके परिवार के पास कुल 1,11,77,889 रुपये की ऐसी संपत्ति है, जिसका कोई कानूनी हिसाब उनके पास मौजूद नहीं है।
कुल संपत्ति का मूल्यांकन: सीबीआई की एफआईआर में यह साफ तौर पर दर्ज किया गया है कि जांच अवधि के अंत तक लाविडिया और उनके परिजनों की कुल परिसंपत्तियों का बाजार मूल्य 4,31,60,820 रुपये आंका गया है।
पत्नी पर उकसाने का आरोप: इस पूरे मामले में उनकी पत्नी शिप्रा श्रीवास्तव पर अपने पति को अवैध रूप से संपत्ति हासिल करने में मदद करने और उकसाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
दिल्ली स्थित आवास से जब्ती: सीबीआई द्वारा 9 मई 2025 को की गई छापेमारी के दौरान दिल्ली में शिप्रा श्रीवास्तव के आवास से 54 लाख रुपये नकद और कई प्रॉपर्टी के दस्तावेज बरामद हुए थे।
पुराना रिश्वतखोरी का केस: 9 मई 2025 को ही दर्ज एक अन्य सीबीआई केस में लाविडिया पर करदाताओं के पक्ष में टैक्स अपील के फैसले सुनाने के बदले अनुचित लाभ लेने का आरोप लगा था।
जांच अधिकारी की नियुक्ति: 2004 बैच के आईआरएस अधिकारी लाविडिया और उनकी पत्नी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच की कमान सीबीआई निरीक्षक नवीन कुमार को सौंपी गई है।
यह भी पढ़ें: यूपीआई शुल्क पर कांग्रेस में ही उलझा पेच: राहुल का विरोध, लेकिन पार्टी सांसदों ने की थी पैरवी; क्या है मामला?
पत्नी पर क्या हैं आरोप?
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, नौ मई 2025 को आरोपी अधिकारियों के ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान कई ऐसे कागजात मिले जिन्होंने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। इन छापों में लाविडिया, उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए गए। इसके अलावा दिल्ली स्थित आवासीय परिसर से संपत्तियों के ब्योरे वाली रफ शीट और बड़ी मात्रा में कैश बरामद हुआ, जिसके बाद दोनों के खिलाफ शिकंजा कसता चला गया।
कौन हैं आरोपी अफसर और कहां थी तैनाती?
भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के 2004 बैच के वरिष्ठ अधिकारी जीवनलाल लाविडिया हैदराबाद में इनकम टैक्स कमिश्नर के पद पर तैनात थे। इसके साथ ही उनके पास प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त कार्यालय में आयकर आयुक्त (अपील) यूनिट-7 और यूनिट-8 का अतिरिक्त प्रभार भी था। अपने इसी प्रभावशाली पद का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए उन्होंने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की, जिसमें उनकी पत्नी ने भी बराबर का साथ दिया।
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सीबीआई की जांच में क्या निकलकर आया सामने?
केंद्रीय जांच एजेंसी की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी-III), नई दिल्ली ने इस मामले में 10 सितंबर को औपचारिक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। सीबीआई के मुताबिक, एक अप्रैल 2022 से 10 मई 2025 की जांच अवधि के दौरान जीवनलाल लाविडिया ने पद पर रहते हुए अवैध तरीके से अकूत संपत्ति हासिल की। दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि उनके पास मौजूद कुल चल-अचल संपत्ति उनकी वैध आय के मुकाबले 57.10 प्रतिशत अधिक पाई गई है।
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अवैध कमाई का पूरा हिसाब-किताब क्या?
आय और खर्च का अंतर: सीबीआई के गणित के अनुसार, तय समय में अधिकारी की कुल वैध आय 1,95,74,358 रुपये थी, जबकि इसी दौरान उनका कुल खर्च और खरीदी गई संपत्तियां 3,07,52,247 रुपये तक पहुंच गईं।
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अघोषित संपत्ति का आंकड़ा: जांच एजेंसी ने गणना के बाद पाया कि अधिकारी और उनके परिवार के पास कुल 1,11,77,889 रुपये की ऐसी संपत्ति है, जिसका कोई कानूनी हिसाब उनके पास मौजूद नहीं है।
कुल संपत्ति का मूल्यांकन: सीबीआई की एफआईआर में यह साफ तौर पर दर्ज किया गया है कि जांच अवधि के अंत तक लाविडिया और उनके परिजनों की कुल परिसंपत्तियों का बाजार मूल्य 4,31,60,820 रुपये आंका गया है।
पत्नी पर उकसाने का आरोप: इस पूरे मामले में उनकी पत्नी शिप्रा श्रीवास्तव पर अपने पति को अवैध रूप से संपत्ति हासिल करने में मदद करने और उकसाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
दिल्ली स्थित आवास से जब्ती: सीबीआई द्वारा 9 मई 2025 को की गई छापेमारी के दौरान दिल्ली में शिप्रा श्रीवास्तव के आवास से 54 लाख रुपये नकद और कई प्रॉपर्टी के दस्तावेज बरामद हुए थे।
पुराना रिश्वतखोरी का केस: 9 मई 2025 को ही दर्ज एक अन्य सीबीआई केस में लाविडिया पर करदाताओं के पक्ष में टैक्स अपील के फैसले सुनाने के बदले अनुचित लाभ लेने का आरोप लगा था।
जांच अधिकारी की नियुक्ति: 2004 बैच के आईआरएस अधिकारी लाविडिया और उनकी पत्नी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच की कमान सीबीआई निरीक्षक नवीन कुमार को सौंपी गई है।
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पत्नी पर क्या हैं आरोप?
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, नौ मई 2025 को आरोपी अधिकारियों के ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान कई ऐसे कागजात मिले जिन्होंने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। इन छापों में लाविडिया, उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए गए। इसके अलावा दिल्ली स्थित आवासीय परिसर से संपत्तियों के ब्योरे वाली रफ शीट और बड़ी मात्रा में कैश बरामद हुआ, जिसके बाद दोनों के खिलाफ शिकंजा कसता चला गया।
कौन हैं आरोपी अफसर और कहां थी तैनाती?
भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के 2004 बैच के वरिष्ठ अधिकारी जीवनलाल लाविडिया हैदराबाद में इनकम टैक्स कमिश्नर के पद पर तैनात थे। इसके साथ ही उनके पास प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त कार्यालय में आयकर आयुक्त (अपील) यूनिट-7 और यूनिट-8 का अतिरिक्त प्रभार भी था। अपने इसी प्रभावशाली पद का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए उन्होंने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की, जिसमें उनकी पत्नी ने भी बराबर का साथ दिया।