{"_id":"6abf75887827f9a5820ae539","slug":"captain-smit-machchhar-friends-reveal-untold-stories-of-the-calm-and-grounded-indian-pilot-2026-10-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"'स्मित को कभी घबराते नहीं देखा': भारतीय पायलट के सहकर्मियों और दोस्तों ने सुनाए पुराने किस्से; खोले कई राज","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
'स्मित को कभी घबराते नहीं देखा': भारतीय पायलट के सहकर्मियों और दोस्तों ने सुनाए पुराने किस्से; खोले कई राज
Fri, 02 Oct 2026 02:51 PM IST
शिवम गर्ग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम गर्ग
Updated Fri, 02 Oct 2026 02:51 PM IST
सार
फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार को दोस्त और सहकर्मी शांत, सहज और मददगार बताते हैं। फ्लाइट में गंभीर संकट के दौरान घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में भूमिका निभाई। आखिर उनके व्यक्तित्व की कौन-सी खूबियां इस संकट में काम आईं? आइए, जानते हैं...
विज्ञापन
कैप्टन स्मित मच्छार
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
कॉकपिट में गंभीर संकट के बीच संयम बनाए रखने वाले कैप्टन स्मित मच्छार को उनके दोस्त और सहकर्मी लंबे समय से एक शांत और सहज व्यक्ति के तौर पर जानते हैं। उनके साथ फ्लाइंग स्कूल के दिनों से दोस्ती रखने वाले कैप्टन धरव गोसालिया के मुताबिक, स्मित बेहद शांत, सरल और जमीन से जुड़े इंसान हैं। उनकी यही आदत सिर्फ पायलटों तक सीमित नहीं थी। बताया जाता है कि वह एयरपोर्ट पर लोडर, इंजीनियर, ग्राउंड स्टाफ और कैटरिंग कर्मचारियों से भी उसी सम्मान के साथ बात करते थे।
विज्ञापन
फ्लाईदुबई की उड़ान में अचानक सामने आया संकट
बीते बुधवार को फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान एफजेड1073 में स्थिति अचानक बेहद गंभीर हो गई। विमान में 174 लोग सवार थे। इस्राइली अधिकारियों के मुताबिक, कॉकपिट में सह-पायलट ने कैप्टन स्मित पर हमला किया और विमान पर नियंत्रण लेने की कोशिश की।
विज्ञापन
फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, विमान ने बेहद कम समय में करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई गंवाई। घायल होने के बावजूद स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू करने में मदद की। विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।
विज्ञापन
फ्लाइंग स्कूल में भी साथियों की मदद के लिए रहते थे तैयार
न्यूजीलैंड के मेनलैंड एविएशन कॉलेज से स्मित ने कमर्शियल पायलट लाइसेंस हासिल किया था। उनके साथ पढ़ने वाले पायलट बताते हैं कि मुश्किल विषयों को समझने के लिए साथी अक्सर उन्हीं के पास जाते थे। एयर नेविगेशन या विमान के तकनीकी विषयों से जुड़ी किसी समस्या में वह अपने साथियों की मदद करते थे। बाद में फ्लाईदुबई में लाइन ट्रेनर की जिम्मेदारी संभालना भी उनके करियर का अहम हिस्सा बना।
स्कूल के दोस्तों को आज भी याद है 'बिंदास' स्मित
स्मित ने 2003 में मुंबई के एमडी भाटिया स्कूल से दसवीं की पढ़ाई पूरी की थी। उनके बचपन के दोस्त भाविन जेठवा उन्हें सीधा-सादा और 'बिंदास' बताते हैं। दोस्तों के मुताबिक, स्मित को झूठ बोलना पसंद नहीं था। वह दिखावा करने के बजाय जैसे थे, वैसे ही रहने वाले इंसान थे। बचपन में उनके साथ क्रिकेट खेलने वाले अमित सोनी भी उन्हें खुशमिजाज और जिंदादिल बताते हैं।
पड़ोसियों की मदद करने में भी आगे रहते थे
मुंबई के तिलक नगर स्थित स्वास्तिक हाइट्स में स्मित करीब 2022 तक रहे। पड़ोसी लक्ष्मीकांत जोशी के मुताबिक, स्मित छोटी-छोटी चीजों में भी लोगों की मदद करने से पीछे नहीं हटते थे। एक बार जोशी केन्या से लौटे तो दोस्तों के लिए कॉफी कम पड़ गई। स्मित ने अपने एक पायलट साथी के जरिए उनके लिए और कॉफी मंगवाने की व्यवस्था की।
जोशी को वह समय भी याद है, जब करीब छह महीने पहले स्मित के पिता की बाईपास सर्जरी हुई थी। भारत लौटते ही स्मित सीधे अस्पताल पहुंचे और इलाज के दौरान परिवार के साथ रहे।
2022 में दुबई गए, फ्लाईदुबई में बने कैप्टन
स्मित ने करीब 2022 में स्पाइसजेट छोड़कर दुबई का रुख किया। इसके बाद उन्होंने फ्लाईदुबई में बोइंग 737 के कैप्टन और लाइन ट्रेनर के तौर पर काम शुरू किया। उनकी पेशेवर प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें बोइंग 737 परिवार के विमानों पर लंबा उड़ान अनुभव है।
उनकी पत्नी सोनल और दो बच्चे हैं। घटना के बाद उनके परिवार और परिचितों के बीच चिंता का माहौल रहा, लेकिन बाद में उनके माता-पिता ने सोसायटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में उनके ठीक होने की जानकारी दी।
सहकर्मियों ने बताया- संकट में दो फैसले बेहद अहम रहे
स्मित के सहकर्मियों ने घटना के दौरान उनके सामने आई परिस्थितियों को समझने की कोशिश की। एक पायलट के मुताबिक, विमान में मौजूद सुरक्षा उपकरणों को लेकर अलग-अलग संभावनाएं सामने आई हैं, लेकिन घटना की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। एक अन्य पायलट ने बताया कि हमले के दौरान स्मित के सिर और सीने पर चोटें आईं। इसके बावजूद उन्होंने विमान को संभालने में भूमिका निभाई।
सहकर्मियों के मुताबिक, इस घटना में दो बातें खास रहीं पहली, बेहद मुश्किल स्थिति में विमान को फिर से स्थिर करना और दूसरी, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोल पाना। घटना से जुड़े कई विवरण अभी जांच के दायरे में हैं।
स्कूल के दोस्तों ने की जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना
फ्लाईदुबई की घटना के बाद स्मित के पुराने स्कूल के दोस्तों ने उनके लिए प्रार्थनाएं कीं। उनके दोस्त भाविन जेठवा ने कहा कि उन्हें स्मित पर गर्व है। जिस व्यक्ति को दोस्त वर्षों से शांत, खुशमिजाज और दूसरों की मदद करने वाला बताते रहे, उसी स्वभाव की झलक मुश्किल घड़ी में भी दिखाई दी।