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Nepal-India Relations: नेपाल-भारत संबंधों पर वैश्विक हालातों का पड़ रहा असर, क्या नई दिशा देने की है जरूरत?

Mon, 06 Jul 2026 10:57 PM IST
निर्मल कांत आईएएनएस, नई दिल्ली/काठमांडू।
आईएएनएस, नई दिल्ली/काठमांडू। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 06 Jul 2026 10:57 PM IST
सार

Nepal-India Relations: भारत और नेपाल के संबंध मजबूत बने हुए हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों को व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने और आपसी विश्वास मजबूत करने की जरूरत है। पढ़िए रिपोर्ट-

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Balen Shah administration must impart new momentum to Nepal-India relations: Report
भारत-नेपाल संबंध - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

नेपाल मानता है कि भारत एक उभरती हुई वैश्विक ताकत बन रहा है। वहीं, भारत ने भी लगातार नेपाल की संप्रभुता और रणनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान किया है। दोनों देशों के बीच संबंधों के आगे बढ़ने में कोई बाधा नहीं है। एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। 
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क्या संबंधों में सुधार की जरूरत है?
रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक बयानबाजी और अस्थायी आशंकाओं से पैदा चिंताएं लंबे समय तक प्रभावी नहीं रहतीं। इसमें कहा गया है कि शक्ति असंतुलन और छोटा देश होने की असुरक्षा जैसी धारणाओं से आगे बढ़कर व्यावहारिक साझेदारी बनाना जरूरी है, जिससे दोनों देशों के लोगों का कल्याण हो सके।
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वैश्विक हालात का संबंधों पर असर पड़ रहा?
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की केंद्रीय समिति सदस्य बिश्वदीप पांडे ने एक भारतीय प्रमुख समाचार चैनल की वेबसाइट के लिए अपने लेख में लिखा कि आज के वैश्विक हालात को 'अनिश्चितता और बदलती वास्तविकताओं के युग' के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय संबंध लगातार बदल रहे हैं, इसलिए देशों को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सतर्क रहना होगा।
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नेपाल-भारत संबंधों की बुनियाद पर क्या कहा?
पांडे ने कहा कि भौगोलिक स्थिति, सभ्यतागत संबंध, जनता के बीच मजबूत संपर्क और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों के संबंधों की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा, वैश्विक राजनीति लगातार बदल रही है। इसके लिए कोई एक देश या सरकार अकेले जिम्मेदार नहीं है।

आरएसी प्रमुख की भारत यात्रा पर क्या कहा?
रिपोर्ट में नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने की भारत यात्रा का जिक्र किया गया है। यह यात्रा भारतीय जनता पार्टी के निमंत्रण पर हुई थी। इसे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, लामिछाने की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री जैसे शीर्ष नेताओं-अधिकारियों से उनकी मुलाकात हुई। इससे संकेत मिलता है कि भारत नेपाल के राजनीतिक बदलावों पर करीब से नजर रख रहा है।

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नेपाल की नई सरकार से क्या उम्मीदें हैं?
रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल की भारत यात्रा और एस जयशंकर के साथ उनकी बैठक में कई शुरुआती समझौतों पर सहमति बनी, जिससे दोनों देशों के बीच सकारात्मक शुरुआत का संकेत मिला।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार को नेपाल-भारत संबंधों में नई गति और गर्मजोशी लाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए और भारत से भी इसी तरह की पारस्परिक अपेक्षा की जाती है।
 
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