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Sirmour News: डिजिटल अरेस्ट से डरें नहीं, देश में ऐसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
Fri, 09 Oct 2026 12:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
Updated Fri, 09 Oct 2026 12:54 AM IST
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अदालत-1
डीएलएसए ने नाहन कोर्ट स्टाफ के लिए लगाया जागरूकता शिविर, साइबर ठगी से बचाव के बताए तरीके
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। साइबर ठगी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं के बीच जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सिरमौर ने नाहन में कोर्ट स्टाफ के लिए जागरूकता शिविर लगाया। शिविर में डीएलएसए सिरमौर के सचिव नव कमल मौजूद रहे। पुलिस विभाग के साइबर अपराध विशेषज्ञों ने कर्मचारियों को साइबर धोखाधड़ी के तरीकों और बचाव के उपायों की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने बताया कि साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और किसी मामले में नाम आने या गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे मांगते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है और कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती।
कर्मचारियों को अनजान लोगों के साथ बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या निजी विवरण साझा न करने की सलाह दी गई। किसी संदिग्ध कॉल, लिंक या संदेश पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी सत्यता जांचने पर भी जोर दिया गया।
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साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की जानकारी दी गई। डीएलएसए सचिव नव कमल ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही बचाव का प्रभावी माध्यम है।
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डीएलएसए ने नाहन कोर्ट स्टाफ के लिए लगाया जागरूकता शिविर, साइबर ठगी से बचाव के बताए तरीके
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। साइबर ठगी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं के बीच जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सिरमौर ने नाहन में कोर्ट स्टाफ के लिए जागरूकता शिविर लगाया। शिविर में डीएलएसए सिरमौर के सचिव नव कमल मौजूद रहे। पुलिस विभाग के साइबर अपराध विशेषज्ञों ने कर्मचारियों को साइबर धोखाधड़ी के तरीकों और बचाव के उपायों की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने बताया कि साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और किसी मामले में नाम आने या गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे मांगते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है और कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती।
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कर्मचारियों को अनजान लोगों के साथ बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या निजी विवरण साझा न करने की सलाह दी गई। किसी संदिग्ध कॉल, लिंक या संदेश पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी सत्यता जांचने पर भी जोर दिया गया।
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साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की जानकारी दी गई। डीएलएसए सचिव नव कमल ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही बचाव का प्रभावी माध्यम है।