हस्तकला: मशीनों की चमक में फीकी पड़ रही पारंपरिक कारीगरी, रोजी-रोटी बचाने में जुटे हिमाचल प्रदेश के कारीगर
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा मेले में पारंपरिक लकड़ी और लोहे के उत्पाद बनाने वाले कारीगरों को इस बार भी बिक्री की उम्मीद के मुताबिक ग्राहक नहीं मिल रहे। मशीनी और प्लास्टिक से बनी सस्ती वस्तुओं की बढ़ती मांग ने उनके पुश्तैनी कारोबार को प्रभावित किया है। पढ़ें पूरी खबर...
विस्तार
मशीनीकरण के बढ़ते चलन ने परंपरागत लकड़ी और लोहे की वस्तुएं बनाने वाले कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में इस बार भी इन कारीगरों ने अपने हाथों से तैयार किए उत्पाद बिक्री के लिए सजाए, लेकिन ग्राहकों की अपेक्षित रुचि नहीं मिलने से उन्हें निराशा हाथ लगी है। परंपरागत कारोबार से जुड़े कारीगरों का कहना है कि अब यह काम घाटे का सौदा बनता जा रहा है। इसके बावजूद वे अपने पुश्तैनी हुनर और कारोबार को जिंदा रखने की कोशिश में जुटे हैं। बाजार में मशीनी और प्लास्टिक से बनी वस्तुओं की बढ़ती मांग के बीच उनके लिए अपने पारंपरिक काम को बचाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।
कारीगरों का कहना है कि लकड़ी से बनी रसोई और रोजमर्रा के इस्तेमाल की अन्य वस्तुएं पर्यावरण के अनुकूल होती हैं। इनके इस्तेमाल से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता, जबकि इनकी जगह बाजार में तेजी से बिक रही प्लास्टिक की वस्तुएं पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हैं। इसके बावजूद सस्ती और आसानी से उपलब्ध होने वाली मशीनी वस्तुओं के आगे पारंपरिक उत्पादों की मांग लगातार प्रभावित हो रही है। ऐसे में कारीगर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपनी पीढ़ियों से चली आ रही कला और हुनर को बचाने में जुटे हैं।
दशहरा मेले में परंपरागत वस्तुओं का कारोबार उतना अधिक नहीं हो रहा है जिसकी उम्मीद की थी। इसकी खरीददारी बहुत कम हो गई है। हमें इस काम को करते हुए 40 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। दशहरा मेले में हमने ढोल-नगाड़े, सहित अन्य रोजमर्रा का सामान लगा रखा है लेकिन इन वस्तुओं के खरीदार अब गिने चुने ही रह गए हैं। -चेतरी देवी, कारीगर, पनारसा
पंद्रह वर्षों से दशहरा मेले में परंपरागत वस्तुओं की दुकान लगाता आ रहा हूं। इसको खरीदने का रुझान लोगों में लगातार कम होता जा रहा है। लकड़ी से बनी वस्तुएं पर्यावरण के लिए भी काफी फायदेमंद होती हैं लेकिन लोग सस्ता खरीदने के चक्कर में प्लास्टिक की बनी वस्तुओं को खरीदने में प्राथमिकता दे रहे हैं। -देवेंद्र कुमार, कारोबारी, बजौरा