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केसीसी ऋण : 35 हजार के एवज में 43,628 रुपये चुकाने के आदेश
Mon, 07 Sep 2026 08:38 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 07 Sep 2026 08:38 AM IST
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धर्मशाला। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण की अदायगी न करना व्यक्ति पर भारी पड़ गया। वरिष्ठ सिविल जज पालमपुर गौरव कुमार की अदालत ने एसबीआई की ओर से दायर 43,628 रुपये की वसूली के वाद को मंजूर कर लिया है। अदालत ने प्रतिवादी को 35 हजार रुपये के एवज में बकाया 43,628 रुपये 11.75 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश जारी किए हैं।
यह ब्याज वाद दायर करने की तिथि से पूरी राशि चुकता होने तक देना होगा। बैंक के अनुसार पालमपुर क्षेत्र के व्यक्ति ने 11 फरवरी 2016 को 35 हजार रुपये के केसीसी ऋण के लिए आवेदन किया था। ऋण मंजूर होने और आवश्यक समझौते निष्पादित करने के बावजूद उसने तय शर्तों के तहत रकम वापस नहीं लौटाई।
इसके बाद 28 जनवरी 2019 और 22 दिसंबर 2021 को ऋण खाते से जुड़े पुनर्जीवन पत्र (रिवाइवल लेटर) भी निष्पादित किए गए। बैंक प्रबंधन की ओर से खाता नियमित करने और बकाया राशि चुकाने के लिए कई बार पत्राचार व आग्रह किया गया, लेकिन कर्जदार ने कोई भुगतान नहीं किया। अदालत ने मामले में कानूनी नोटिस की विधिवत तामील करवाई, इसके बावजूद प्रतिवादी अदालत में हाजिर नहीं हुआ।
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इस पर अदालत ने 19 फरवरी 2024 को उसे एकतरफा (एक्स-पार्टी) घोषित कर दिया था। सुनवाई के दौरान एसबीआई शाखा प्रबंधक ने अदालत में गवाही देते हुए ऋण आवेदन, स्वीकृति पत्र, समझौते, पुनर्जीवन पत्र, कानूनी नोटिस और खाते का पूर्ण विवरण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। प्रतिवादी की अनुपस्थिति के कारण बैंक के सभी साक्ष्य अप्रतिवादित रहे। इसके आधार पर अदालत ने बैंक के पक्ष में डिक्री जारी करते हुए बकाया राशि ब्याज सहित वसूलने का फैसला सुनाया।
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यह ब्याज वाद दायर करने की तिथि से पूरी राशि चुकता होने तक देना होगा। बैंक के अनुसार पालमपुर क्षेत्र के व्यक्ति ने 11 फरवरी 2016 को 35 हजार रुपये के केसीसी ऋण के लिए आवेदन किया था। ऋण मंजूर होने और आवश्यक समझौते निष्पादित करने के बावजूद उसने तय शर्तों के तहत रकम वापस नहीं लौटाई।
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इसके बाद 28 जनवरी 2019 और 22 दिसंबर 2021 को ऋण खाते से जुड़े पुनर्जीवन पत्र (रिवाइवल लेटर) भी निष्पादित किए गए। बैंक प्रबंधन की ओर से खाता नियमित करने और बकाया राशि चुकाने के लिए कई बार पत्राचार व आग्रह किया गया, लेकिन कर्जदार ने कोई भुगतान नहीं किया। अदालत ने मामले में कानूनी नोटिस की विधिवत तामील करवाई, इसके बावजूद प्रतिवादी अदालत में हाजिर नहीं हुआ।
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इस पर अदालत ने 19 फरवरी 2024 को उसे एकतरफा (एक्स-पार्टी) घोषित कर दिया था। सुनवाई के दौरान एसबीआई शाखा प्रबंधक ने अदालत में गवाही देते हुए ऋण आवेदन, स्वीकृति पत्र, समझौते, पुनर्जीवन पत्र, कानूनी नोटिस और खाते का पूर्ण विवरण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। प्रतिवादी की अनुपस्थिति के कारण बैंक के सभी साक्ष्य अप्रतिवादित रहे। इसके आधार पर अदालत ने बैंक के पक्ष में डिक्री जारी करते हुए बकाया राशि ब्याज सहित वसूलने का फैसला सुनाया।