हिमाचल प्रदेश: शिपकी ला से चीन के साथ एक ही बार व्यापार, आईजीएसटी बना रोड़ा
उत्तराखंड और सिक्किम से व्यापार पैसों के लेन-देन से होता है जबकि शिपकी ला के रास्ते सामान का अदान-प्रदान होता है, इसलिए व्यापारी आईजीएसटी न लगाने की मांग कर रहे हैं।
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किन्नौर जिले के शिपकी ला के रास्ते चीन के साथ छह साल बाद शुरू हुआ पारंपरिक सीमा व्यापार महज एक बार चलने के बाद ठप हो गया है। चीन से आयातित वस्तुओं पर एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) लगाए जाने को लेकर भारतीय कारोबारियों ने व्यापार बंद कर दिया है। कारोबारियों ने केंद्र सरकार से आईजीएसटी में भी छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक इस पर फैसला नहीं होता, तब तक पंजीकृत व्यापारी चीन के साथ कारोबार नहीं करेंगे। बता दें कि चीन के साथ हिमाचल के अलावा उत्तराखंड और सिक्किम से होता है।
उत्तराखंड और सिक्किम से व्यापार पैसों के लेन-देन से होता है जबकि शिपकी ला के रास्ते सामान का अदान-प्रदान होता है, इसलिए व्यापारी आईजीएसटी न लगाने की मांग कर रहे हैं। किन्नौर प्रशासन ने एक अगस्त से शिपकी ला के रास्ते चीन के साथ व्यापार शुरू किया था। पहले दिन 16 कारोबारी करीब 2.22 लाख रुपये का भारतीय सामान लेकर तिब्बत के शिपकी गांव पहुंचे। इसके बाद तीन अगस्त को कारोबारी चीन से आयातित सामान लेकर वापस लौटे। शिपकी ला सीमा के पास बनाए गए छुप्पन ट्रेड मार्ट में इस सामान पर आईजीएसटी वसूला गया। इसके बाद किन्नौर इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन ने बैठक कर इस मामले पर चर्चा की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक चीन से आयातित वस्तुओं पर आईजीएसटी से छूट नहीं मिलती, तब तक कोई भी पंजीकृत व्यापारी सीमा पार व्यापार नहीं करेगा। इसके बाद से शिपकी ला के रास्ते व्यापार बंद है।
कारोबारी बोले- आईजीएसटी के कारण पड़ रहा वित्तीय बोझ
व्यापारियों का कहना है कि आईजीएसटी लगाए जाने से उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है। उनका तर्क है कि भारत सरकार की अधिसूचना संख्या 38/96-सीमा शुल्क के तहत 23 जुलाई 1996 से इस पारंपरिक सीमा व्यापार को सीमा शुल्क से छूट दी गई थी। किन्नौर इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष हिशे नेगी ने कहा कि शिपकी ला के रास्ते होने वाला व्यापार सामान्य वाणिज्यिक आयात-निर्यात गतिविधि नहीं है। यह सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की पारंपरिक आजीविका का साधन है। एसोसिएशन ने छह अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र किन्नौर उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से भेजा गया है। हालांकि, अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।
शिपकी ला के रास्ते चीन के साथ व्यापार एक अगस्त को शुरू किया गया था। आईजीएसटी के विरोध में पंजीकृत व्यापारियों ने फिलहाल कारोबार नहीं करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में हिमाचल प्रदेश सरकार के उद्योग सचिव को पत्र लिखा गया है। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार से भी मामले को लेकर बातचीत हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष मामला उठाने का आश्वासन दिया है। यह विषय केंद्र के राजस्व और सीमा शुल्क विभाग के संज्ञान में भी है।-अमित कुमार शर्मा, उपायुक्त, किन्नौर