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Yamuna Nagar News: कैंटीन चलाकर महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
Tue, 08 Sep 2026 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 08 Sep 2026 12:58 AM IST
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छछरौली अनाज मंडी की कैंटीन में खाना तैयार करती महिलाएं। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गांव खदरी में वर्ष 2014 में शुरू हुआ लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह महिलाओं के लिए स्वरोजगार का माध्यम बना हुआ है। समूह की महिलाएं छछरौली में कैंटीन चलाकर आत्मनिर्भर बनने की राह पर चल पड़ीं हैं।
वहीं समूह से जुड़ी कुछ महिलाएं कपड़ों और कॉस्मेटिक का काम कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। समूह की गतिविधियों से महिलाओं को घर के साथ-साथ अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। समूह की प्रधान कमलेश, सचिव परमजीत और खजांची सोमवती के साथ अन्य महिलाएं मिलकर गतिविधियों को आगे बढ़ा रही हैं।
महिलाओं का कहना है कि समूह के माध्यम से उन्हें एक-दूसरे का सहयोग मिलता है और काम को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास किए जाते हैं। कपड़े और कॉस्मेटिक से जुड़े काम के माध्यम से महिलाएं अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी योगदान दे रही हैं।
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समूह की प्रधान कमलेश स्वरोजगार के क्षेत्र में खुद भी उदाहरण पेश कर रही हैं। वह छछरौली में कैंटीन चला रही हैं। कैंटीन के संचालन से उन्हें नियमित रूप से काम करने और आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। कमलेश का कहना है कि महिलाओं में हुनर और काम करने की इच्छा हो तो स्वयं सहायता समूह उनके लिए बेहतर मंच साबित हो सकते हैं।
लक्ष्मी समूह से जुड़ी महिलाओं का उद्देश्य अपने काम को और आगे बढ़ाना है। उनका कहना है कि समूह के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे समूह महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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यमुनानगर। गांव खदरी में वर्ष 2014 में शुरू हुआ लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह महिलाओं के लिए स्वरोजगार का माध्यम बना हुआ है। समूह की महिलाएं छछरौली में कैंटीन चलाकर आत्मनिर्भर बनने की राह पर चल पड़ीं हैं।
वहीं समूह से जुड़ी कुछ महिलाएं कपड़ों और कॉस्मेटिक का काम कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। समूह की गतिविधियों से महिलाओं को घर के साथ-साथ अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। समूह की प्रधान कमलेश, सचिव परमजीत और खजांची सोमवती के साथ अन्य महिलाएं मिलकर गतिविधियों को आगे बढ़ा रही हैं।
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महिलाओं का कहना है कि समूह के माध्यम से उन्हें एक-दूसरे का सहयोग मिलता है और काम को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास किए जाते हैं। कपड़े और कॉस्मेटिक से जुड़े काम के माध्यम से महिलाएं अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी योगदान दे रही हैं।
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समूह की प्रधान कमलेश स्वरोजगार के क्षेत्र में खुद भी उदाहरण पेश कर रही हैं। वह छछरौली में कैंटीन चला रही हैं। कैंटीन के संचालन से उन्हें नियमित रूप से काम करने और आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। कमलेश का कहना है कि महिलाओं में हुनर और काम करने की इच्छा हो तो स्वयं सहायता समूह उनके लिए बेहतर मंच साबित हो सकते हैं।
लक्ष्मी समूह से जुड़ी महिलाओं का उद्देश्य अपने काम को और आगे बढ़ाना है। उनका कहना है कि समूह के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे समूह महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।