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Yamuna Nagar News: महिलाओं को सशक्त बना रहीं कविता कांबोज
Tue, 03 Nov 2026 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 03 Nov 2026 02:31 AM IST
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गांव बहादुरपुर में ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण देती कविता। स्वयं
यमुनानगर। गांव बहादुरपुर की कविता कांबोज महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं। पिछले तीन वर्ष से वह महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित करने के साथ उन्हें रोजगारपरक गतिविधियों का प्रशिक्षण दे रही हैं। वह अब तक करीब एक हजार महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। इनमें हरियाणा के अलावा पंजाब और हिमाचल प्रदेश की महिलाएं भी शामिल हैं।
इस पहल की शुरुआत करीब 10 महिलाओं के छोटे से समूह के रूप में हुई थी। वर्ष 2018 में ग्रुप का विस्तार हुआ। गांव के लोगों के सहयोग और महिलाओं की रुचि से यह पहल धीरे-धीरे बड़े अभियान में बदल गई। कविता कांबोज ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से जुड़कर महिलाओं को प्रशिक्षण देती हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल उन्हें हुनर सिखाना नहीं, बल्कि उस हुनर के माध्यम से आमदनी का साधन तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। प्रशिक्षण में महिलाओं को बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी जाती है।
जूट के उत्पाद और हस्तशिल्प उत्पाद बनाना सीख रहीं महिलाएं : प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं को जूट के बैग, जूट की गुड़िया, सजावटी वस्तुएं, सिलाई-कढ़ाई और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करना सिखाया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाएं बारीकी से काम सीखती हैं, ताकि वे घर से ही छोटे स्तर पर अपना काम शुरू कर सकें।
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इस पहल से महिलाओं को अपनी प्रतिभा निखारने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल रहा है। कविता का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्र की अधिक से अधिक महिलाएं अपने हुनर को रोजगार में बदलें और किसी पर निर्भर रहने के बजाय खुद की पहचान बनाएं। संवाद
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इस पहल की शुरुआत करीब 10 महिलाओं के छोटे से समूह के रूप में हुई थी। वर्ष 2018 में ग्रुप का विस्तार हुआ। गांव के लोगों के सहयोग और महिलाओं की रुचि से यह पहल धीरे-धीरे बड़े अभियान में बदल गई। कविता कांबोज ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से जुड़कर महिलाओं को प्रशिक्षण देती हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल उन्हें हुनर सिखाना नहीं, बल्कि उस हुनर के माध्यम से आमदनी का साधन तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। प्रशिक्षण में महिलाओं को बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी जाती है।
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जूट के उत्पाद और हस्तशिल्प उत्पाद बनाना सीख रहीं महिलाएं : प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं को जूट के बैग, जूट की गुड़िया, सजावटी वस्तुएं, सिलाई-कढ़ाई और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करना सिखाया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाएं बारीकी से काम सीखती हैं, ताकि वे घर से ही छोटे स्तर पर अपना काम शुरू कर सकें।
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इस पहल से महिलाओं को अपनी प्रतिभा निखारने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल रहा है। कविता का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्र की अधिक से अधिक महिलाएं अपने हुनर को रोजगार में बदलें और किसी पर निर्भर रहने के बजाय खुद की पहचान बनाएं। संवाद