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Hisar News: हॉस्टल में कमरे पड़े कम, फर्श पर गद्दे बिछाकर ठिकाना बनाने की मजबूरी, जीजेयू के हॉस्टल के एक कमरे में सात-आठ विद्यार्थी रह रहे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 12:53 AM IST
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Few rooms in the hostel, forced to make do by spreading mattresses on the floor
जीजेयू के हॉस्टल में फर्श पर बिछे गद्दे। 
हिसार। गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) के हॉस्टल में जगह की कमी का आलम यह है कि विद्यार्थियों को कमरों के साथ-साथ जमीन पर गद्दे लगाकर सोने को मजबूर होना पड़ रहा है। हॉस्टल नंबर-1 में एक कमरा एक विद्यार्थी के लिए निर्धारित है लेकिन कई कमरों में तीन-तीन विद्यार्थी रह रहे हैं।
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जगह नहीं मिलने पर कुछ विद्यार्थी सात-आठ तक की संख्या में एक कमरा साझा कर रहे हैं। हजारों विद्यार्थी हॉस्टल के लिए प्रतीक्षा सूची में हैं।विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ हॉस्टल की मांग भी बढ़ रही है। जीजेयू में उपलब्ध क्षमता जरूरत के मुकाबले कम पड़ रही है। इससे विद्यार्थियों को रहने और पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही।
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9800 रुपये फीस, फिर भी सुविधाओं की कमी
जीजेयू में हॉस्टल के लिए विद्यार्थियों से करीब 9800 रुपये शुल्क लिया जाता है। इसके बावजूद बिजली जाने पर पर्याप्त बैकअप की व्यवस्था नहीं होने की शिकायत है। पानी के लिए वाटर कूलर लगाए गए हैं लेकिन विद्यार्थियों के अनुसार कई कूलर पूरी तरह काम नहीं करते। सर्दियों में परेशानी और बढ़ जाती है। हॉस्टल में लगे गीजर भी ठीक से काम नहीं करने की शिकायत है। विद्यार्थियों को अपने स्तर पर पानी गर्म करने के लिए रॉड आदि की व्यवस्था करनी पड़ती है। इसके लिए अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की भी शिकायत है।
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कैमरे लगे लेकिन बंद रहने की शिकायत
हॉस्टल में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि कई कैमरे अक्सर बंद रहते हैं। ऐसे में निगरानी व्यवस्था प्रभावित होती है। विश्वविद्यालय में करीब 120 सुरक्षा गार्ड की ड्यूटी है। विद्यार्थियों के अनुसार इनमें करीब 80 ही निर्धारित सुरक्षा ड्यूटी कर रहे हैं। अन्य गार्डों को दूसरे कार्यों में लगाया जाता है।
आठ हॉस्टल, आठ मेस, भोजन पर विद्यार्थी संतुष्ट नहीं
जीजेयू में आठ हॉस्टलों के लिए आठ मेस संचालित हैं। विद्यार्थियों के अनुसार मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। कभी रोटी कच्ची होती है तो कभी चावल अच्छे से पके नहीं होते। कमरों की कमी के साथ भोजन की व्यवस्था भी विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।
फायर सेफ्टी पर भी उठे सवाल
हॉस्टल में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के इंतजामों को लेकर भी विद्यार्थियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बचाव और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। हॉस्टल में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहते हैं। ऐसे में सुरक्षा इंतजामों में कमी गंभीर समस्या बन सकती है।
तीन साल से नए हॉस्टल की चर्चा
जीजेयू में नए हॉस्टल बनाने और मौजूदा क्षमता बढ़ाने की चर्चा करीब तीन साल से चल रही है। अभी तक विद्यार्थियों को नई क्षमता का लाभ नहीं मिला है। लगातार बढ़ती मांग के बीच बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रतीक्षा सूची में हैं। ऐसे में नए हॉस्टल का निर्माण और मौजूदा क्षमता बढ़ाना प्रमुख जरूरत बन गया है।
राजकीय पीजी कॉलेज के हॉस्टल में व्यवस्था दुरुस्त
राजकीय पीजी कॉलेज के हॉस्टल में स्थिति अलग है। यहां एक कमरे में तीन छात्राएं रह रही हैं और कमरे की निर्धारित क्षमता भी तीन विद्यार्थियों की है। सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे हैं। भोजन की व्यवस्था अच्छी है और साफ-सफाई के लिए कर्मचारी तैनात हैं।
गीजर और वाटर कूलर की सुविधा उपलब्ध है। फायर सेफ्टी के इंतजाम भी किए गए हैं। सुरक्षा के लिए दो गार्ड के अलावा एक वार्डन और एक अधीक्षक तैनात हैं। हालांकि हॉस्टल की मांग अधिक होने के कारण करीब 40 छात्राएं प्रतीक्षा सूची में हैं।

इसे देखते हुए नए हॉस्टल की क्षमता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। नए हॉस्टल का नक्शा तैयार करवाकर स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है। अब मंजूरी का इंतजार है।
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