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हरियाणा में काम पर जाने का खर्च देश से 54% ज्यादा: निजी वाहनों पर निर्भरता, बस-मेट्रो से सफर कम रहे कामगार

Sun, 18 Oct 2026 09:40 AM IST
Naveen आशीष वर्मा, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, चंडीगढ़ Published by: Naveen Updated Sun, 18 Oct 2026 09:40 AM IST
सार

ट्रांसपोर्ट मंत्री अनिल विज ने बताया कि हरियाणा में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक हजार नई बसें खरीदी जा रही हैं। इनमें 500 इलेक्टि्रक व 500 सामान्य बसें शामिल हैं। ये बसें चरणबद्ध आएंगी। इन बसों के आने से शहरों में सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा।

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cost of commuting to work is 54% higher than national average In Haryana
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज - फोटो : संवाद

विस्तार

हरियाणा में नौकरीपेशा लोगों और कामगारों के लिए रोजाना कार्यस्थल तक पहुंचना महंगा साबित हो रहा है। कामगारों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा आने-जाने के खर्च में ही निकल रहा है। प्रदेश में निश्चित कार्यस्थल तक आने-जाने वाला कामगार औसतन 1,212 रुपये प्रति माह खर्च करता है। यह राष्ट्रीय औसत 785 रुपये के मुकाबले करीब 54 प्रतिशत अधिक है। इससे साफ है कि हरियाणा में कामगारों पर परिवहन खर्च का दबाव देश के औसत से कहीं ज्यादा है।

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यह बोझ केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण हरियाणा में निश्चित कार्यस्थल तक जाने वाले कामगार भी औसतन 1,048 रुपये प्रति माह खर्च करते हैं, जबकि देश के ग्रामीण कामगारों का औसत खर्च महज 612 रुपये है। यानी हरियाणा के ग्रामीण कामगारों को भी यात्रा पर राष्ट्रीय ग्रामीण औसत से काफी अधिक रकम खर्च करनी पड़ती है। उनका मासिक खर्च राष्ट्रीय शहरी औसत 1,044 रुपये के लगभग बराबर है।
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सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के देश के पहले राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वे (एनएचटीएस) में यह तस्वीर सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, दिल्ली में मासिक खर्च 2,038 रुपये, गोवा में 2,165 रुपये, मिजोरम में 1,507, लद्दाख में 1,531, केरल में 1,415 और चंडीगढ़ में 1,383 रुपये है। वहीं, पड़ोसी पंजाब में यह खर्च 953 रुपये, राजस्थान में 773 और उत्तर प्रदेश में 700 रुपये है।

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सार्वजनिक परिवहन से दूरी, निजी वाहनों पर निर्भरता ज्यादा

हरियाणा के शहरों में काम पर जाने वाले लोगों के बीच सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल राष्ट्रीय औसत के मुकाबले करीब आधा है। जुलाई 2025 से जून 2026 में हुए सर्वे के मुताबिक शहरी हरियाणा में महज 7.1 प्रतिशत कामगार बस, ट्रेन, मेट्रो या ट्राम से कार्यस्थल तक पहुंचते हैं, जबकि राष्ट्रीय शहरी औसत 14.2 प्रतिशत है। इसके उलट, प्रदेश में निजी वाहनों पर निर्भरता अधिक है।

हरियाणा में 45.4 प्रतिशत कामगार दोपहिया वाहनों से काम पर जाते हैं, जो राष्ट्रीय औसत 42.6 प्रतिशत से ज्यादा है। कार के मामले में यह अंतर और बड़ा है। प्रदेश में 10 प्रतिशत लोग कार से कार्यस्थल पर पहुंचते हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह हिस्सेदारी करीब तीन प्रतिशत है। शहरी हरियाणा में कार से जाने वालों का आंकड़ा 15.4 प्रतिशत है, जबकि देश के शहरों में यह 5.7 प्रतिशत है। हालांकि, कार और दोपहिया का संयुक्त हिस्सा हरियाणा के शहरों में 55.8 प्रतिशत और राष्ट्रीय स्तर पर 58 प्रतिशत है। ये आंकड़े सार्वजनिक परिवहन की पहुंच और कामगारों की यात्रा लागत पर सवाल खड़े करते हैं।

कामकाजी महिलाओं पर सफर का ज्यादा बोझ

हरियाणा में कामकाजी महिलाओं के लिए रोजगार तक पहुंचना पुरुषों के मुकाबले ही नहीं, देश की अन्य महिलाओं की तुलना में भी महंगा है। प्रदेश की कामकाजी महिलाएं आने-जाने पर औसतन 1,129 रुपये प्रति माह खर्च करती हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत महज 533 रुपये है। यात्रा के साधनों के आंकड़े भी महिलाओं की अलग-अलग जरूरतों और निर्भरता को सामने लाते हैं। हरियाणा में जहां 47.7 प्रतिशत पुरुष कामगार दोपहिया वाहनों से काम पर जाते हैं, वहीं महिलाओं में यह हिस्सेदारी सिर्फ 20.5 प्रतिशत है।

इसके बजाय 26.4 प्रतिशत महिलाएं पैदल, 23.1 प्रतिशत ऑटो-रिक्शा और 12.4 प्रतिशत बस से सफर करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बस महिलाओं के लिए रोजगार तक पहुंचने का अहम साधन है। हरियाणा की 21.1 प्रतिशत ग्रामीण महिला कामगार बस से कार्यस्थल पहुंचती हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 9.9 प्रतिशत है। पड़ोसी पंजाब में यह आंकड़ा 30.7 प्रतिशत है। शहरी हरियाणा में 27.3 प्रतिशत महिला कामगार ऑटो और 15.3 प्रतिशत कार से काम पर जाती हैं, जबकि 9.1 प्रतिशत बस का इस्तेमाल करती हैं।

हरियाणा में खरीदी जा रही हैं एक हजार बसें

ट्रांसपोर्ट मंत्री अनिल विज ने बताया कि हरियाणा में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक हजार नई बसें खरीदी जा रही हैं। इनमें 500 इलेक्टि्रक व 500 सामान्य बसें शामिल हैं। ये बसें चरणबद्ध आएंगी। इन बसों के आने से शहरों में सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा। इसके अलावा औद्योगिक नगरी, सिविल अस्पताल और शिक्षण संस्थानों में बसों के फेरे बढ़ाए जा रहे हैं। बसों में रियल-टाइम ट्रैकिंग, मोबाइल एप से आगमन की जानकारी, बस स्टैंड पर डिजिटल डिस्प्ले की सुविधा बढ़ाई जा रही है, जिससे यात्रियों की सुविधा और बढ़ेगी। वहीं, हरियाणा में मेट्रो का विस्तार किया जा रहा है।

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