{"_id":"6a99d32cca15e4f0b208860f","slug":"brigadier-sheoran-who-nurtured-sportspersons-in-the-army-retired-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1010-159900-2026-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: सेना में खिलाड़ी तराशने वाले ब्रिगेडियर श्योराण सेवानिवृत्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: सेना में खिलाड़ी तराशने वाले ब्रिगेडियर श्योराण सेवानिवृत्त
Fri, 04 Sep 2026 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 04 Sep 2026 01:36 AM IST
विज्ञापन
सत्यव्रत श्योराण।
- फोटो : 1
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाढड़ा। भारतीय सेना में करीब 38 वर्षों तक खिलाड़ियों को तराशने वाले इंडियन आर्मी खेल परिषद के अध्यक्ष ब्रिगेडियर सत्यव्रत श्योराण सेवानिवृत्त हो गए हैं। खिलाड़ी, प्रशिक्षक, तकनीकी अधिकारी, खेल प्रशासक और सैन्य अधिकारी के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
गांव चांदवास निवासी सत्यव्रत श्योराण का बाल्यकाल से ही खेलों के प्रति विशेष लगाव रहा। वे यूनिवर्सिटी टॉपर रहते हुए सीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आर्मी की खेल विंग में भर्ती हुए। सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सत्यव्रत श्योराण ने खेल प्रबंधन में स्नातकोत्तर उपाधि, वैश्य महाविद्यालय भिवानी से कला स्नातक व नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान, पटियाला से एथलेटिक्स प्रशिक्षण में डिप्लोमा प्राप्त किया।
भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में 110 मीटर बाधा दौड़ का रिकॉर्ड भी उनके नाम रहा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेल परिषद की एथलेटिक्स तकनीकी समिति में वर्ष 2009 से 2017 तक सेवाएं दीं। 19वें राष्ट्रमंडल खेलों और 18वें एशियाई खेलों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। सातवें सैन्य विश्व खेलों में एथलेटिक्स प्रतियोगिता के निदेशक रहे।
विज्ञापन
पुणे स्थित सेना शारीरिक प्रशिक्षण संस्थान के कमांडेंट के रूप में उन्होंने खेल एवं प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास और आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खडग़वासला और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में उन्होंने भावी सैन्य अधिकारियों को शारीरिक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया। उनको सराहनीय सेवाओं के लिए सेना प्रमुख प्रशंसा पत्र, सेना कमांडर-इन-चीफ प्रशंसा पत्र सहित कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान प्रदान किए गए।
विज्ञापन
गांव चांदवास निवासी सत्यव्रत श्योराण का बाल्यकाल से ही खेलों के प्रति विशेष लगाव रहा। वे यूनिवर्सिटी टॉपर रहते हुए सीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आर्मी की खेल विंग में भर्ती हुए। सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सत्यव्रत श्योराण ने खेल प्रबंधन में स्नातकोत्तर उपाधि, वैश्य महाविद्यालय भिवानी से कला स्नातक व नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान, पटियाला से एथलेटिक्स प्रशिक्षण में डिप्लोमा प्राप्त किया।
विज्ञापन
भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में 110 मीटर बाधा दौड़ का रिकॉर्ड भी उनके नाम रहा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेल परिषद की एथलेटिक्स तकनीकी समिति में वर्ष 2009 से 2017 तक सेवाएं दीं। 19वें राष्ट्रमंडल खेलों और 18वें एशियाई खेलों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। सातवें सैन्य विश्व खेलों में एथलेटिक्स प्रतियोगिता के निदेशक रहे।
विज्ञापन
पुणे स्थित सेना शारीरिक प्रशिक्षण संस्थान के कमांडेंट के रूप में उन्होंने खेल एवं प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास और आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खडग़वासला और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में उन्होंने भावी सैन्य अधिकारियों को शारीरिक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया। उनको सराहनीय सेवाओं के लिए सेना प्रमुख प्रशंसा पत्र, सेना कमांडर-इन-चीफ प्रशंसा पत्र सहित कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान प्रदान किए गए।