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Bhiwani News: 17,619 फीट की ऊंचाई पर पूर्व सैनिक श्रीपाल ने दौड़ी फुल मैराथन
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विजेता खिलाड़ी पूर्व सैनिक श्रीपाल यादव।
भिवानी। सेक्टर-23 निवासी पूर्व सैनिक एवं धावक श्रीपाल यादव ने 17,619 फीट की दुर्गम ऊंचाई पर 42.2 किलोमीटर की फुल मैराथन पूरी कर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया। 13 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस स्पर्धा में उन्होंने अदम्य साहस, उत्कृष्ट फिटनेस और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया।
लद्दाख के अत्यधिक ऊंचाई वाले बर्फीले और पथरीले क्षेत्र में आयोजित होने वाली यह मैराथन दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों में गिनी जाती है। यहां ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी और शून्य के करीब तापमान के बीच 42.2 किलोमीटर की दूरी तय करना आसान नहीं होता। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में श्रीपाल ने पूरी मैराथन सफलतापूर्वक पूरी की।
उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि अनुशासन, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच के जरिए जीवन की किसी भी कठिन चुनौती पर विजय पाई जा सकती है। उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियों में सफलता हासिल करने के लिए शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी है। सेना में मिले अनुशासन और प्रशिक्षण ने उन्हें इस चुनौती के लिए तैयार किया। श्रीपाल की इस उपलब्धि से क्षेत्र के युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।
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सेना के अनुभव ने दी हिम्मत
पूर्व सैनिक श्रीपाल यादव ने कहा कि भारतीय सेना में बिताए वर्षों ने उन्हें कभी परिस्थितियों के आगे झुकना नहीं सिखाया। लद्दाख मैराथन सिर्फ शारीरिक क्षमता की नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता की भी सबसे बड़ी परीक्षा थी। 17 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर हर सांस के साथ संघर्ष करना पड़ता था। ऐसे समय में मातृभूमि का गौरव और भिवानी का नाम रोशन करने का जज्बा ही उनकी असली ताकत बना।
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लद्दाख के अत्यधिक ऊंचाई वाले बर्फीले और पथरीले क्षेत्र में आयोजित होने वाली यह मैराथन दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों में गिनी जाती है। यहां ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी और शून्य के करीब तापमान के बीच 42.2 किलोमीटर की दूरी तय करना आसान नहीं होता। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में श्रीपाल ने पूरी मैराथन सफलतापूर्वक पूरी की।
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उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि अनुशासन, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच के जरिए जीवन की किसी भी कठिन चुनौती पर विजय पाई जा सकती है। उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियों में सफलता हासिल करने के लिए शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी है। सेना में मिले अनुशासन और प्रशिक्षण ने उन्हें इस चुनौती के लिए तैयार किया। श्रीपाल की इस उपलब्धि से क्षेत्र के युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।
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सेना के अनुभव ने दी हिम्मत
पूर्व सैनिक श्रीपाल यादव ने कहा कि भारतीय सेना में बिताए वर्षों ने उन्हें कभी परिस्थितियों के आगे झुकना नहीं सिखाया। लद्दाख मैराथन सिर्फ शारीरिक क्षमता की नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता की भी सबसे बड़ी परीक्षा थी। 17 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर हर सांस के साथ संघर्ष करना पड़ता था। ऐसे समय में मातृभूमि का गौरव और भिवानी का नाम रोशन करने का जज्बा ही उनकी असली ताकत बना।