फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Study reveals: Polluted air in Delhi is causing multiple problems and preventing sunlight

शोध में खुलासा: दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाली हवा बनी कई मुसीबतों का सबब, जमीन तक नहीं पहुंचने दे रही धूप

Fri, 09 Oct 2026 01:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 09 Oct 2026 01:28 AM IST
सार

एक नए अध्ययन के मुताबिक, हवा में मौजूद बेहद महीन कण यानी एरोसोल सूर्य की रोशनी को सोखने और बिखेरने के कारण जमीन तक पहुंचने वाली धूप कम कर देते हैं। इससे सतह कम गर्म होती है। वहीं, हवाएं भी कमजोर पड़ती हैं। इसका प्रदूषकों की मात्रा दिल्ली में बढ़ जाती है।

विज्ञापन
Study reveals: Polluted air in Delhi is causing multiple problems and preventing sunlight
demo pic - फोटो : AI Generated

विस्तार

दिल्ली की जहरीली हवाएं सिर्फ सांसों पर संकट नहीं पैदा कर रहीं, प्रदूषण को दूर-दूर तक फैलने से रोककर खुद इसको बढ़ाने की वजह भी बन रही हैं। एक नए अध्ययन के मुताबिक, हवा में मौजूद बेहद महीन कण यानी एरोसोल सूर्य की रोशनी को सोखने और बिखेरने के कारण जमीन तक पहुंचने वाली धूप कम कर देते हैं। इससे सतह कम गर्म होती है। वहीं, हवाएं भी कमजोर पड़ती हैं। इसका प्रदूषकों की मात्रा दिल्ली में बढ़ जाती है। इसका नतीजा धूल के महीन कण पीएम2.5 व पीएम10 देर तक जमीन के करीब जमा हो जाते हैं।

विज्ञापन


भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) समेत दूसरे संस्थानों की ओर से सितंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच किए गए अध्ययन किया गया। एक से 10 नवंबर 2023 के बीच दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति गंभीर होने पर जमीन तक पहुंचने वाली सूर्य की ऊर्जा में करीब 80 वाट प्रति वर्ग मीटर तक की कमी दर्ज की गई। सतह का तापमान थोड़ा कम होने से हवा की प्राकृतिक आवाजाही कमजोर हुई और प्रदूषण को फैलाने की क्षमता घट गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि नवंबर में दिल्ली के वातावरण की प्रदूषण फैलाने की क्षमता 20 फीसदी तक कम हो गई। जनवरी में यह कमी करीब 10-12 फीसदी रही।
विज्ञापन


100-200 मीटर पतली हुई प्रदूषण फैलाने वाली हवा की परत
नवंबर में पीएम2.5 का स्तर करीब 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया था। दिन के समय इसका स्तर सामान्य तौर पर 200 से 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच रहा। अध्ययन में पाया गया कि दोपहर के समय जमीन के करीब प्रदूषकों को ऊपर और दूर ले जाने वाली हवा की परत 100 से 200 मीटर तक पतली हो गई। सतह के पास हवाओं की गति भी 0.4 मीटर प्रति सेकंड तक कम हुई। इससे जमीन के करीब पीएम2.5 की मात्रा में 37-40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक अतिरिक्त बढ़ोतरी हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


जनवरी में 550 तक पहुंचा पीएम2.5
अध्ययन के दौरान, पीएम2.5 का स्तर करीब 550 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंचा। कम तापमान, ज्यादा नमी, कमजोर हवाएं, कोहरा और निचले बादल पहले ही प्रदूषण को जमीन के पास रोकने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहे थे। ऐसे में धूप कम होने के कारण एरोसोल का अतिरिक्त प्रभाव नवंबर के मुकाबले कम रहा। जनवरी में हवाओं की गति करीब 0.2 मीटर प्रति सेकंड कमजोर हुई और प्रदूषण फैलाने वाली हवा की परत 40-50 मीटर तक पतली हुई। मॉडल में जमीन के करीब पीएम2.5 में करीब 25 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की अतिरिक्त वृद्धि दिखाई गई।

प्रदूषण बढ़ा तो मौसम भी बदला
शोध बताता है कि प्रदूषण और मौसम के बीच दोतरफा संबंध है। आम तौर पर हवा, तापमान और नमी जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियों को प्रदूषण फैलने या जमा होने का कारण माना जाता है। लेकिन अध्ययन बताता है कि बहुत अधिक एरोसोल खुद स्थानीय मौसम की परिस्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे एक चक्र सा बन जाता है। इसमें प्रदूषण बढ़ने से धूप कम होती है।


आईआईटीएम ने किया अध्ययन
एटमोस्फोरिक कमेस्ट्री एंड फिजिक्स के हालिया अंक में प्रकाशित इस शोध को भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे ने किया था। इसमें सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिलिस और नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक के शोधकर्ता भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने सितंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच दिल्ली के प्रदूषण और मौसम की परिस्थितियों का अध्ययन किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed