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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Smart system to be installed at 12 non-interlocked crossings.

Delhi NCR News: 12 नॉन-इंटरलॉक्ड क्रॉसिंग पर लगेगा स्मार्ट सिस्टम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2026 06:53 PM IST
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गेट बंद और लॉक होने पर ही बनेगा ऑटो परमिट नंबर
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शनि पाथौली
नई दिल्ली।
रेलवे क्रॉसिंग पर गेट खुला रहने या उसके लॉक होने की सही जानकारी समय पर नहीं मिलने से पैदा होने वाले सुरक्षा जोखिम को कम करने के लिए उत्तर रेलवे दिल्ली में स्मार्ट तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और सुरक्षित परिचालन को लेकर 12 नॉन-इंटरलॉक्ड रेलवे क्रॉसिंग पर स्मार्ट रियल टाइम गेट पोजीशन व ऑटो परमिट नंबर (पीएन) प्रणाली लगाने की योजना बनाई है। इससे स्टेशन मास्टर को क्रॉसिंग के गेट की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलेगी।
रेलवे का कहना है कि स्मार्ट तकनीक से गेट का बूम पूरी तरह बंद होने और लॉकिंग लीवर के संचालित होने के बाद ही सिस्टम परमिट नंबर जारी करेगा। इससे गेट की स्थिति को लेकर होने वाली गलतफहमी और मानवीय चूक की आशंका कम होगी। इसका उद्देश्य उन क्रॉसिंग पर सुरक्षा की एक अतिरिक्त लेयर तैयार करना है, जहां अभी पूर्ण इंटरलॉकिंग व्यवस्था नहीं है। ऐसी जगहों पर गेटमैन और स्टेशन मास्टर के बीच सही तालमेल बेहद जरूरी होता है, ताकि गेट की स्थिति की पुष्टि किए बिना ट्रेन संचालन से जुड़ा फैसला जोखिम पैदा न करे। रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन और सड़क यातायात का आमना-सामना होता है। ऐसे में गेट बंद होने की सही जानकारी और समय दोनों ही सड़क उपयोगकर्ताओं के साथ रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।
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गेट की स्थिति जानने के लिए लगेंगी टच स्क्रीन : योजना के तहत प्रत्येक स्थान पर स्टेशन मास्टर और लेवल क्रॉसिंग दोनों जगह 10.1 इंच की टच स्क्रीन लगाई जाएगी। इन पर ट्रेन का नंबर और गेट की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। दोनों इकाइयां वायरलेस उपकरण के जरिये एक-दूसरे से जुड़ी रहेंगी। गेट की स्थिति बदलने पर क्रॉसिंग इकाई इसकी जानकारी स्टेशन मास्टर की इकाई तक पहुंचाएगी। इसी तरह गेट खुला होने पर स्टेशन मास्टर की स्क्रीन पर लाल संकेत दिखाई देगा, जबकि गेट बंद होने पर हरा संकेत मिलेगा। इससे स्टेशन मास्टर को यह समझने में आसानी होगी कि क्रॉसिंग पर गेट की वास्तविक स्थिति क्या है।
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बूम और उसे लॉक करने के लिए लगेंगे सेंसर : सिस्टम में क्रॉसिंग गेट के बूम और उसे लॉक करने वाले लीवर की स्थिति पता लगाने के लिए सेंसर भी लगाए जाएंगे। ये सेंसर मौसम रोधी आवरण में होंगे और गेट के बंद होने के साथ उसके लॉक होने की स्थिति की भी पहचान करेंगे। इसके अलावा ट्रैक संकेतक व इंटरनेट आधारित तकनीक से जुड़ी लीवर लॉक व्यवस्था की प्रक्रिया को आपस में जोड़ने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य गेट को अनधिकृत तरीके से खोले जाने से रोकना है।

गेट की स्थिति से जुड़ेगी
ऑटो परमिट नंबर प्रणाली : इस व्यवस्था में ऑटो परमिट नंबर जारी करने की प्रक्रिया को गेट की वास्तविक स्थिति से जोड़ा जाएगा। सेंसर लगातार गेट के बूम और लॉकिंग लीवर की निगरानी करेंगे। जब बूम बंद होगा और लॉकिंग लीवर भी संचालित हो जाएगा, तभी क्रॉसिंग इकाई में परमिट नंबर तैयार होगा। स्टेशन मास्टर द्वारा ट्रेन का नंबर और उसके ऊपर या नीचे की दिशा से संबंधित जानकारी दर्ज करने पर भी प्रणाली इस प्रक्रिया के अनुरूप काम करेगी। इससे सुनिश्चित होगा कि गेट बंद और लॉक होने की पुष्टि के बिना परमिट नंबर जारी न हो। इससे गेटमैन और स्टेशन मास्टर के बीच केवल मौखिक सूचना पर निर्भरता भी घटेगी।


खराबी की स्थिति में भी दर्ज रहेगा रिकॉर्ड: सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रणाली में फेल-सेफ व्यवस्था, बैकअप और आंकड़ों को सुरक्षित रखने की सुविधा भी शामिल की गई है। गेटमैन और स्टेशन मास्टर के बीच होने वाली प्रत्येक संबंधित कार्रवाई का रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिसे जरूरत पड़ने पर बाद में देखा जा सकेगा। इससे किसी घटना या तकनीकी समस्या की जांच के दौरान यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि गेट की स्थिति और परमिट नंबर से जुड़ी प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई थी। इस परियोजना को पूरा करने के लिए छह महीने की अवधि निर्धारित की गई है।
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