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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Protecting the rights of low-wage earners is the responsibility of the courts: High Court

कम वेतन पाने वालों के अधिकारों की रक्षा करना अदालतों का दायित्व: हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 07:31 PM IST
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रेलवे वेंडरों के नियमितीकरण मामले में टिप्पणी, रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बेहद चिंताजनक बताया
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि अदालतों को समाज के कमजोर वर्गों और कम वेतन पाने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, ताकि संविधान की प्रस्तावना में परिकल्पित भारत का समाजवादी ढांचा कायम रहे। न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने भारतीय रेलवे द्वारा नियुक्त वेंडरों के नियमितीकरण से जुड़े मामले में आठ सितंबर को यह टिप्पणी की।
पीठ ने कहा कि अब समय आ गया है कि अदालतें समाज के कमजोर वर्गों और मामूली वेतन पाने वाले लोगों के हितों की रक्षा करें, ताकि लोकतंत्र का समाजवादी ढांचा, जो संविधान की प्रस्तावना का लक्ष्य है, अक्षुण्ण रहे। मामले में याचिकाकर्ता वेंडरों को रेलवे ने कमीशन के आधार पर नियुक्त किया था। वर्षों तक सेवा देने के बाद उन्होंने नियमितीकरण की मांग को लेकर केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) का रुख किया।
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वर्ष 2016 में कैट ने रेलवे को 90 दिनों के भीतर उनकी सेवाएं नियमित करने, भत्तों का भुगतान करने और मुकदमेबाजी का खर्च देने का निर्देश दिया था। न्यायाधिकरण ने यह भी कहा था कि ये बेहद गरीब लोग हैं, जिन्हें अपना हक पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ा। इसके बाद केंद्र सरकार ने समीक्षा याचिका दाखिल की, जिसे खारिज कर दिया गया। रेलवे ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि कुछ पात्र वेंडरों को ग्रुप-डी पदों पर नियमित किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे किसी स्क्रीनिंग प्रक्रिया के जरिए कुछ वेंडरों को नियमितीकरण से बाहर नहीं कर सकता था।
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अदालत ने रेलवे की कार्यप्रणाली और ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए इसे बेहद चिंताजनक बताया। पीठ ने कहा कि वेंडरों और बियरर्स के नियमितीकरण में दशकों से कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। अदालत ने इस बात पर भी खेद जताया कि कम वेतन पाने वाले ग्रुप-डी कर्मचारी अपना जायज हक पाने के लिए वर्षों से मुकदमे लड़ रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट कई बार इस संबंध में निर्देश दे चुका है।
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