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Faridabad News: रामजन्म से लेकर ताड़का वध तक के प्रसंगों का मंचन

Sat, 10 Oct 2026 01:28 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:28 AM IST
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Staging of episodes ranging from the birth of Rama to the slaying of Tadaka.
विजय रामलीला कमेटी के मंच पर नाग पर खड़े श्रीहरि विष्णु का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। मार्केट नंबर-1 में विजय रामलीला कमेटी के मंच पर बृहस्पतिवार रात रामजन्म से लेकर ताड़का वध तक के प्रसंगों का मंचन किया गया। भगवान विष्णु के विराट रूप, चारों भाइयों के जन्म की खुशियों और राम-लक्ष्मण के वन जाने के दृश्यों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। वहीं, ताड़का वध के बाद पंजाबी अंदाज में किए गए स्यापे और हास्य टप्पों ने माहौल को मनोरंजक बना दिया। कार्यक्रम देर रात तक चला।

मंचन की शुरुआत भगवान विष्णु के माता कौशल्या को स्वप्न में दर्शन देने के दृश्य से हुई। कमेटी की ओर से तैयार किए गए विराट रूप में संपूर्ण ब्रह्मांड के बीच नाग पर खड़े श्रीहरि विष्णु का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा। विष्णु की भूमिका में निशांत नागपाल और माता कौशल्या की भूमिका में मनोज शर्मा ने अभिनय किया। इस दौरान भगवान विष्णु ने माता कौशल्या से कहा, ले जन्म कोख से तेरी, मैं दशरथ नंदन कहलाऊंगा, मिटा कर वंश असुरों का तेरी कीर्ति बढ़ाऊंगा। इसके बाद भगवान राम सहित चारों भाइयों के जन्म की खुशियां मनाई गईं।
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अगले दृश्य में राक्षसों के उत्पात से परेशान ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार पहुंचे। उन्होंने यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को अपने साथ भेजने का आग्रह किया। राजा दशरथ ने पहले दोनों को भेजने से इनकार कर दिया, लेकिन कुलगुरु वशिष्ठ के समझाने पर वह राजी हो गए। इसके बाद राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ वन की ओर रवाना हुए।
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ताड़का वध के दृश्य पर गूंजे ठहाके

रामलीला में ताड़का वध का प्रसंग दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहा। भगवान राम के हाथों ताड़का के वध के बाद पंजाबी भाषा में किए गए स्यापे ने लोगों का खूब मनोरंजन किया। पंडित रघुनाथ शर्मा के हास्यपूर्ण टप्पों पर दर्शक हंसते नजर आए। कमेटी के अनुसार, ताड़का वध का यह प्रसंग पिछले दो दशक से दर्शकों के बीच लोकप्रिय है और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। अंतिम दृश्य में राम, लक्ष्मण और सीता के बड़े होने का प्रसंग दिखाया गया। राम द्वारा धनुष उठाने के बाद राजा जनक ने स्वयंवर की घोषणा की।
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