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Delhi NCR News: ठेकेदार ने कबूला-इमारत मालिक के बेटे के कहने पर हटाया पिलर
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पिलर और सीढ़ियां हटाने के करीब आधे घंटे बाद जमींदोज हुआ डेज पीजी हॉस्टल, पुलिस जांच में सामने आईं कई गंभीर लापरवाहियां
पुरुषोत्तम वर्मा
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में डेज पीजी हॉस्टल हादसे की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। गिरफ्तार ठेकेदार सनोज ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि इमारत के मालिक के बेटे महेश के कहने पर उसने पिलर, बेसमेंट से ऊपर जाने वाली सीढ़ियां और पार्टिशन की दीवार हटाई थी। पिलर और सीढ़ियां हटाने के करीब आधे घंटे बाद ही इमारत जमींदोज हो गई। पुलिस की शुरुआती जांच में भी पिलर हटाए जाने और इमारत ढहने के बीच संबंध सामने आया है।
दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय इमारत के बेसमेंट को भरने का काम चल रहा था। बेसमेंट का एक हिस्सा लगभग भर दिया गया था। वहां बीच में पिलर के अलावा बेसमेंट से ऊपर आने वाली सीढ़ियां और पार्टिशन के लिए बनी दीवार मौजूद थी। आरोप है कि भवन मालिक और उसके बेटे महेश के कहने पर इन हिस्सों को हटाया गया।
पुलिस के मुताबिक, सनोज के पास निर्माण कार्य का न तो कोई अनुभव था और न ही लाइसेंस। वह कामचलाऊ मिस्त्री के तौर पर काम करता था। उसे और उसके दो मजदूरों को एक दिन के काम के करीब 2800 रुपये मिलते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बिना तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह के महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्सों को हटाने का फैसला क्यों लिया गया।
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भार संभाल रहा था पिलर
जांच में सामने आया है कि जिस पिलर को हटाया गया, उस पर इमारत के एक हिस्से का भार था। यह पिलर इमारत के फ्रंट की तरफ स्थित था। इसके हटते ही संरचना का संतुलन बिगड़ गया और इमारत आगे की तरफ ढह गई। वहीं, हटाई गई दीवार पार्टिशन के लिए बनी थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि भवन मालिक और उसके बेटे की भूमिका क्या थी और निर्माण कार्य से जुड़े फैसलों में उनकी कितनी सीधी जिम्मेदारी थी।
बेसमेंट में पहले से पानी का रिसाव हो रहा था
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बेसमेंट में पहले से ही पानी का रिसाव हो रहा था। इसके बावजूद वहां निर्माण कार्य जारी था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई और पिलर हटाने जैसे महत्वपूर्ण काम के लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह क्यों नहीं ली गई।
किसे और क्यों किया गया गिरफ्तार
1. मकान मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला व बेटा महेश
ये इमारत में काम करवा रहे थे और वह भी ऐसे ठेकेदार से जिसके पास न तो अनुभव था और न ही लाइसेंस। महेश को निर्माण कार्य कराने का अनुभव नहीं था। पेशेवर व्यक्ति की सलाह नहीं ली गई और न ही उसके निर्देश में काम कराया गया। पुलिस के अनुसार लापरवाही के कारण छात्रों की जान गई।
2. ठेकेदार सनोज
सनोज के पास निर्माण कार्य का न तो अनुभव था और न ही कोई लाइसेंस। मालिक महेश के कहने पर वह निर्माण कार्य करता रहा।
3. हॉस्टल संचालक सुधांशु लवनीश व शुभम त्यागी
इमारत में निर्माण कार्य चलने के दौरान इनकी जिम्मेदारी थी कि वहां रह रहे छात्रों को इसकी जानकारी दें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। पुलिस के अनुसार छात्रों को निर्माण की सूचना नहीं दी गई। अधिक किराया वसूलने समेत अन्य आरोपों की भी जांच की जा रही है।
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पुरुषोत्तम वर्मा
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में डेज पीजी हॉस्टल हादसे की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। गिरफ्तार ठेकेदार सनोज ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि इमारत के मालिक के बेटे महेश के कहने पर उसने पिलर, बेसमेंट से ऊपर जाने वाली सीढ़ियां और पार्टिशन की दीवार हटाई थी। पिलर और सीढ़ियां हटाने के करीब आधे घंटे बाद ही इमारत जमींदोज हो गई। पुलिस की शुरुआती जांच में भी पिलर हटाए जाने और इमारत ढहने के बीच संबंध सामने आया है।
दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय इमारत के बेसमेंट को भरने का काम चल रहा था। बेसमेंट का एक हिस्सा लगभग भर दिया गया था। वहां बीच में पिलर के अलावा बेसमेंट से ऊपर आने वाली सीढ़ियां और पार्टिशन के लिए बनी दीवार मौजूद थी। आरोप है कि भवन मालिक और उसके बेटे महेश के कहने पर इन हिस्सों को हटाया गया।
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पुलिस के मुताबिक, सनोज के पास निर्माण कार्य का न तो कोई अनुभव था और न ही लाइसेंस। वह कामचलाऊ मिस्त्री के तौर पर काम करता था। उसे और उसके दो मजदूरों को एक दिन के काम के करीब 2800 रुपये मिलते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बिना तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह के महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्सों को हटाने का फैसला क्यों लिया गया।
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भार संभाल रहा था पिलर
जांच में सामने आया है कि जिस पिलर को हटाया गया, उस पर इमारत के एक हिस्से का भार था। यह पिलर इमारत के फ्रंट की तरफ स्थित था। इसके हटते ही संरचना का संतुलन बिगड़ गया और इमारत आगे की तरफ ढह गई। वहीं, हटाई गई दीवार पार्टिशन के लिए बनी थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि भवन मालिक और उसके बेटे की भूमिका क्या थी और निर्माण कार्य से जुड़े फैसलों में उनकी कितनी सीधी जिम्मेदारी थी।
बेसमेंट में पहले से पानी का रिसाव हो रहा था
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बेसमेंट में पहले से ही पानी का रिसाव हो रहा था। इसके बावजूद वहां निर्माण कार्य जारी था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई और पिलर हटाने जैसे महत्वपूर्ण काम के लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह क्यों नहीं ली गई।
किसे और क्यों किया गया गिरफ्तार
1. मकान मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला व बेटा महेश
ये इमारत में काम करवा रहे थे और वह भी ऐसे ठेकेदार से जिसके पास न तो अनुभव था और न ही लाइसेंस। महेश को निर्माण कार्य कराने का अनुभव नहीं था। पेशेवर व्यक्ति की सलाह नहीं ली गई और न ही उसके निर्देश में काम कराया गया। पुलिस के अनुसार लापरवाही के कारण छात्रों की जान गई।
2. ठेकेदार सनोज
सनोज के पास निर्माण कार्य का न तो अनुभव था और न ही कोई लाइसेंस। मालिक महेश के कहने पर वह निर्माण कार्य करता रहा।
3. हॉस्टल संचालक सुधांशु लवनीश व शुभम त्यागी
इमारत में निर्माण कार्य चलने के दौरान इनकी जिम्मेदारी थी कि वहां रह रहे छात्रों को इसकी जानकारी दें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। पुलिस के अनुसार छात्रों को निर्माण की सूचना नहीं दी गई। अधिक किराया वसूलने समेत अन्य आरोपों की भी जांच की जा रही है।