फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Early Warning System Installed at Vasundhara Tal for the First Time Developed by CBRI

उत्तराखंड: पहली बार वसुंधरा ताल में लगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, सीबीआरआई ने किया विकसित

Tue, 13 Oct 2026 04:18 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Tue, 13 Oct 2026 04:18 PM IST
सार

यह पहला वैज्ञानिक दल है, जो उत्तराखंड की किसी ग्लेशियल झील में निगरानी एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में गया है। अभियान 15 अक्तूबर 2026 तक प्रस्तावित है। 

विज्ञापन
Early Warning System Installed at Vasundhara Tal for the First Time Developed by CBRI
वसुंधरा ताल में लगा अर्ली वार्निंग सिस्टम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तराखंड में ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लॉफ) के जोखिम को कम करने और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों की निगरानी एवं पूर्व चेतावनी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम आगे बढ़े हैं। वसुंधरा ताल पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया गया। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यह पहली हिमनद झील है जिस पर कोई अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया गया है। इस अर्ली वार्निंग सिस्टम को विकसित करने का काम सीबीआरआई ने किया है।

विज्ञापन


बता दें कि यह पहला वैज्ञानिक दल है, जो उत्तराखंड की किसी ग्लेशियल झील में निगरानी एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में गया है। अभियान 15 अक्तूबर 2026 तक प्रस्तावित है। 
विज्ञापन


उत्तराखंड: बोले सीएम धामी- पीएम मोदी ने विकास को दी रफ्तार, वैश्विक स्तर पर उत्पादों को दिलाई पहचान

विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos

Early Warning System Installed at Vasundhara Tal for the First Time Developed by CBRI

सीबीआरआई और वाडिया के विशेषज्ञों ने की स्थापना

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) की ओर से राष्ट्रीय ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत यह अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान दल में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं।

उच्च हिमालयी और दुर्गम क्षेत्र में अभियान दल की सुरक्षा, आवागमन तथा फील्ड सहयोग के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान भी साथ हैं। यूएसडीएमए की ओर से अभियान के लिए आवश्यक समन्वय एवं लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। अभियान दल को सैटेलाइट फोन और लो अर्थ ऑर्बिट डिवाइस भी उपलब्ध कराए गए हैं। इनके माध्यम से मोबाइल नेटवर्क नहीं होने की स्थिति में भी टीम का यूएसडीएमए के साथ संचार एवं समन्वय बना रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed