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'पाकिस्तान-बांग्लादेश पर कब बोलोगे?': कनेरिया ने यूएन मानवाधिकार संगठन को क्यों घेरा, जमकर सुनाई खरी-खोटी
Sun, 11 Oct 2026 11:42 AM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Sun, 11 Oct 2026 11:42 AM IST
सार
पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी दानिश कनेरिया ने भारत का समर्थन करते हुए संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार संगठन को घेरा है। कनेरिया ने विरोध प्रदर्शन को लेकर यूएन का बयान की निंदा की है।
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दानिश कनेरिया
- फोटो : X
विस्तार
पाकिस्तान के पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया ने भारत का बचाव करते हुए संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार संगठन को घेरा है। कनेरिया ने भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर यूएन मानवाधिकार संगठन के बयान की निंदा की है और पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में अल्पसंख्यों पर हो रहे अत्याचार का उदाहरण दिया है। कनेरिया का कहना है कि यूएन इस मामले पर अपनी चुप्पी कब तोड़ेगा।
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क्या है मामला?
दिल्ली में शनिवार को हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने चिंता जताई थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थामीन अल-खीथान ने शनिवार को जारी बयान में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान सामूहिक हिरासत की खबरों पर चिंता जताई थी। उन्होंने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान सुनिश्चित करने की अपील की थी। संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को आवश्यकता और आनुपातिकता की कड़ी कसौटियों पर खरा उतरना चाहिए।
दिल्ली में शनिवार को हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने चिंता जताई थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थामीन अल-खीथान ने शनिवार को जारी बयान में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान सामूहिक हिरासत की खबरों पर चिंता जताई थी। उन्होंने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान सुनिश्चित करने की अपील की थी। संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को आवश्यकता और आनुपातिकता की कड़ी कसौटियों पर खरा उतरना चाहिए।
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कनेरिया ने दिखाया आइना
अब दानिश कनेरिया ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार को घेरा है और पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में अल्पसंख्यों पर हो रहे अत्याचार को लेकर संगठन की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं। कनेरिया ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार को एक्स पर रिप्लाई देते हुए लिखा, यूएन मानवाधिकार संगठन अपनी चुप्पी कब तोड़ेगा? पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंसा का सामना कर रहे हिंदू अल्पसंख्यकों और चीन में उत्पीड़न का सामना कर रहे उइगर मुसलमानों के पक्ष में कब आवाज उठाएगा?
अब दानिश कनेरिया ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार को घेरा है और पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में अल्पसंख्यों पर हो रहे अत्याचार को लेकर संगठन की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं। कनेरिया ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार को एक्स पर रिप्लाई देते हुए लिखा, यूएन मानवाधिकार संगठन अपनी चुप्पी कब तोड़ेगा? पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंसा का सामना कर रहे हिंदू अल्पसंख्यकों और चीन में उत्पीड़न का सामना कर रहे उइगर मुसलमानों के पक्ष में कब आवाज उठाएगा?
संयुक्त राष्ट्र पर क्यों भड़का भारत?
- फोटो : Amar Ujala Graphics
भारत ने भी यूएन को दिया था जवाब
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की टिप्पणी से भारत ने कड़ी नाराजगी जताई थी। भारत ने इसे देश के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित प्रतिबंध भी लागू होते हैं। भारत ने कहा कि वह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार संविधान द्वारा सुनिश्चित है। साथ ही, देश में मजबूत संस्थागत व्यवस्था, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया मौजूद हैं, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की टिप्पणी से भारत ने कड़ी नाराजगी जताई थी। भारत ने इसे देश के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित प्रतिबंध भी लागू होते हैं। भारत ने कहा कि वह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार संविधान द्वारा सुनिश्चित है। साथ ही, देश में मजबूत संस्थागत व्यवस्था, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया मौजूद हैं, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
पुलिस-प्रदर्शनकारियों में हुई थी नोकझोंक
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए दिए गए आवेदन को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद राजधानी में प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा और परिवहन संबंधी प्रतिबंध लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों की भीड़ को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए इंटरनेट और परिवहन सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई गईं। इनमें दिल्ली मेट्रो, बस और रेल सेवाओं से संबंधित प्रतिबंध शामिल थे। शनिवार सुबह मुंबई से दिल्ली पहुंचे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और दो अन्य नेताओं, सौरव दास तथा आशुतोष रांका को उनकी उड़ान के उतरने के कुछ समय बाद हिरासत में ले लिया गया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद अधिकांश हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया गया। रविवार को दिपके, सौरव और रांका को सशर्त जमानत दी गई।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए दिए गए आवेदन को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद राजधानी में प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा और परिवहन संबंधी प्रतिबंध लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों की भीड़ को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए इंटरनेट और परिवहन सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई गईं। इनमें दिल्ली मेट्रो, बस और रेल सेवाओं से संबंधित प्रतिबंध शामिल थे। शनिवार सुबह मुंबई से दिल्ली पहुंचे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और दो अन्य नेताओं, सौरव दास तथा आशुतोष रांका को उनकी उड़ान के उतरने के कुछ समय बाद हिरासत में ले लिया गया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद अधिकांश हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया गया। रविवार को दिपके, सौरव और रांका को सशर्त जमानत दी गई।