फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Rare Greater Flamingo spotted for the first time in Gangrel reservoir, state bird count reaches 502

छत्तीसगढ़: गंगरेल जलाशय में पहली बार दिखा दुर्लभ ग्रेटर फ्लेमिंगो, प्रदेश में पक्षियों की संख्या 502 हुई

Fri, 23 Oct 2026 04:41 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी Published by: अमन कोशले Updated Fri, 23 Oct 2026 04:41 PM IST
सार

धमतरी स्थित गंगरेल जलाशय में पहली बार दुर्लभ ग्रेटर फ्लेमिंगो दर्ज किया गया है। इसके साथ प्रदेश में पक्षियों की प्रजातियों की संख्या 502 हो गई है। अवैध शिकार रोकने और क्षेत्र को संरक्षित वेटलैंड घोषित करने की मांग उठी है।

विज्ञापन
Rare Greater Flamingo spotted for the first time in Gangrel reservoir, state bird count reaches 502
गंगरेल जलाशय में पहली बार दिखा दुर्लभ ग्रेटर फ्लेमिंगो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के पक्षी रिकॉर्ड में खूबसूरत ग्रेटर फ्लेमिंगो का नाम पहली बार जुड़ गया है, जिससे राज्य में पक्षी प्रजातियों की कुल संख्या बढ़कर 502 पहुंच गई है। आमतौर पर गुजरात के कच्छ और ओडिशा की चिल्का झील में दिखाई देने वाला यह दुर्लभ पक्षी धमतरी और कांकेर जिले में फैले गंगरेल जलाशय में देखा गया है। पक्षी विज्ञानी एएमके भरोस, गोपी किशन साहू, अमर मुलवानी और योगिता साहू के दल ने जलाशय के विभिन्न तटों पर इसकी मौजूदगी दर्ज की है।
विज्ञापन


नए परिंदों का आगमन
शोध दल ने जून 2025 के दौरान गंगरेल जलाशय के दक्षिण-पूर्वी किनारे पर स्थित हरफर और पटौद क्षेत्रों में आठ से 11 फ्लेमिंगो को लगातार भोजन तलाशते देखा। ये परिंदे एशियन ओपनबिल, ब्लैक-हेडेड आइबिस और राज्य के अत्यंत दुर्लभ पक्षी ग्रे प्लोवर के साथ उथले पानी में विचरण कर रहे थे। इसके अलावा हरफर से 10 किलोमीटर दूर बरगेरी और 1 मार्च  को उत्तरी तट पर स्थित फुटाहामुड़ा में सात फ्लेमिंगो का नया झुंड दर्ज हुआ। पक्षी वैज्ञानिकों के अनुसार ओडिशा की चिल्का झील से गुजरात के कच्छ के रण में प्रजनन के लिए लौटते समय यह जलाशय प्रवासी पक्षियों के लिए एक मुख्य प्रवास गलियारा बन गया है।
विज्ञापन


अवैध शिकार का खतरा
गंगरेल क्षेत्र में अवैध शिकार के बढ़ते दबाव के कारण इन प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है। शिकारियों के डर से यह गुलाबी परिंदे बड़े झुंडों में रहने के बजाय छोटे-छोटे समूहों में बिखर रहे हैं। सुरक्षित ठिकाने की तलाश में पक्षियों ने मुख्य किनारों को छोड़कर झील के बीच स्थित एक टापू पर शरण ली है, जो तट से लगभग दो किलोमीटर दूर है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार हर वर्ष अप्रैल माह में हजारों की संख्या में यह गुलाबी पक्षी गंगरेल जलाशय में तीन से चार दिन का पड़ाव डालते हैं। इसके अलावा फुटाहामुड़ा क्षेत्र में गर्मियों के दौरान स्मॉल प्रैटिनकोल और लिटिल रिंग्ड प्लोवर जैसी दुर्लभ प्रजातियां भी अपने घोंसले बनाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पर्यटन केंद्र की संभावनाएं
पर्यावरण और पक्षी प्रेमियों ने इस क्षेत्र को संरक्षित करने की मांग उठाई है। जानकारों का मानना है कि यदि स्थानीय प्रशासन अवैध शिकार पर सख्त रोक लगाए और हरफर-पटौद तथा फुटाहामुड़ा को ‘संरक्षित वेटलैंड’ घोषित करे, तो यह क्षेत्र एक अंतरराष्ट्रीय बर्ड-टूरिज्म और बर्ड-वॉचिंग केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। गंगरेल जलाशय में पक्षी दर्शन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिससे क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed