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सीजी: राज्योत्सव में कला और स्वाद का संगम, झारा आर्ट की कलाकृतियां और छत्तीसगढ़ी पकवान बने आकर्षण

Sun, 01 Nov 2026 07:02 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 01 Nov 2026 07:02 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के शिल्पग्राम में झारा आर्ट की कलाकृतियां और छिंद पेड़ की पारंपरिक कलाकृति आकर्षण का केंद्र हैं। वहीं, गढ़ कलेवा के स्टॉल पर महिला स्व-सहायता समूह छत्तीसगढ़ी व्यंजन परोसकर संस्कृति और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है।

 

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CG: A blend of art and flavor at Rajyotsav; 'Jhara' art creations and Chhattisgarhi delicacies emerge
शिल्पग्राम में झारा आर्ट की छटा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर नवा रायपुर के राज्योत्सव मैदान में आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव में प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और खान-पान की झलक देखने को मिल रही है। राज्योत्सव में विभिन्न विभागों की उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी और स्टॉल लगाए गए हैं। इसी क्रम में शिल्पग्राम जोन में प्रदेश की पारंपरिक हस्तशिल्प कलाओं और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

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शिल्पग्राम में झारा आर्ट की कलाकृतियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। लॉस्ट वैक्स तकनीक से तैयार पारंपरिक शिल्प की मूर्तियां, सजावटी वस्तुएं और लोक आकृतियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।

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शिल्पग्राम में सारंगढ़ जिले के ग्राम कांदुरपाली से आए युवा शिल्पकार प्रदीप झरेका सारबिला झारा आर्ट की कलाकृतियों का प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी छिंद पेड़ की कलाकृति दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस कलाकृति के माध्यम से उन्होंने जनजातीय जीवन और संस्कृति में छिंद पेड़ के महत्व को उकेरा है। इसमें छिंद पेड़ से रस एकत्रित करने की पारंपरिक प्रक्रिया को भी बारीकी से दर्शाया गया है।

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प्रदीप झरेका ने बताया कि राज्योत्सव जैसे आयोजनों से स्थानीय शिल्पकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने और नए लोगों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि झारा आर्ट के प्रति लोगों में काफी उत्साह है। आगंतुक न केवल कलाकृतियों की खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि उनकी निर्माण प्रक्रिया और सांस्कृतिक महत्व के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं। देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और पारंपरिक लोक आकृतियों को भी लोग पसंद कर रहे हैं।


गढ़ कलेवा के स्टॉल पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद ले रहे नागरिक
राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खान-पान का स्वाद भी लोगों को आकर्षित कर रहा है। रायपुर के घड़ी चौक स्थित गढ़ कलेवा से पहुंचा मनीषा महिला स्व-सहायता समूह अपने पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल के माध्यम से लोगों को प्रदेश के पारंपरिक स्वाद से रूबरू करा रहा है।

स्टॉल पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजन चिला, फरा, चौसेला, साबूदाना बड़ा, भजिया, ठेठरी और खुरमी सहित कई तरह के पकवान तैयार कर लोगों को परोसे जा रहे हैं। इन व्यंजनों के जरिए समूह की महिलाएं छत्तीसगढ़ की खान-पान की परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ ही अपनी मेहनत और हुनर का प्रदर्शन कर रही हैं।

मनीषा महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पारंपरिक व्यंजन तैयार कर अपनी आजीविका चला रही हैं और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। उनके इस प्रयास से परिवार के भरण-पोषण में आर्थिक सहयोग मिल रहा है। साथ ही, महिलाएं अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं।

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