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छत्तीसगढ़: गणेश चतुर्थी पर जंगल में गूंजी किलकारी, गजराज के कुनबे में आया नन्हा मेहमान; वन विभाग अलर्ट
Tue, 15 Sep 2026 07:05 PM IST
रायगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
Published by: रायगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 15 Sep 2026 07:05 PM IST
सार
गणेश चतुर्थी के दिन जंगल में एक अनोखा संयोग देखने को मिला। धरमजयगढ़ के बाकारूमा रेंज में 11 हाथियों के दल के बीच मादा हथिनी ने नन्हे शावक को जन्म दिया। शावक के जन्म के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। मां और शावक दोनों सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
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गणेश चतुर्थी पर हुआ हाथी शावक का जन्म
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रायगढ़ में गणेश चतुर्थी के मौके पर धरमजयगढ़ वन मंडल से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी सामने आई है। बाकारूमा रेंज के ससकोबा परिसर में एक मादा हथिनी ने नन्हे शावक को जन्म दिया है। खास बात यह है कि जिस दिन देशभर में भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जा रहा था, उसी दिन जंगल में हाथियों के कुनबे में नए सदस्य का आगमन हुआ। शावक के जन्म के बाद वन विभाग ने उसकी मां और पूरे हाथी दल की निगरानी बढ़ा दी है।
11 हाथियों के दल में नन्हे शावक का जन्म
जानकारी के अनुसार, बाकारूमा रेंज के ससकोबा परिसर 99 पीएफ में करीब 11 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इसी दल में शामिल मादा हथिनी ने गणेश चतुर्थी के दिन शावक को जन्म दिया। शावक अपनी मां के साथ सुरक्षित है और हाथियों का दल फिलहाल जंगल के भीतर विचरण कर रहा है। शावक के जन्म की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है।
मां और शावक पर वन विभाग की नजर
बाकारूमा रेंजर विष्णु मरावी ने बताया कि धरमजयगढ़ वन मंडल में लगातार हाथियों की मौजूदगी बनी हुई है। ऐसे में हाथियों के दल में नए शावक का जन्म महत्वपूर्ण है। वन विभाग का प्रयास है कि मां और शावक दोनों सुरक्षित रहें और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। हाथी मित्र दल के सदस्य भी क्षेत्र में सक्रिय हैं और ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की समझाइश दे रहे हैं।
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गणेश चतुर्थी पर खास संयोग
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन हाथी के शावक के जन्म की खबर सामने आने से यह संयोग और खास हो गया है। हाथी को भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में ग्रामीण और वन्यजीव प्रेमी शावक के जन्म को प्रकृति के लिए शुभ संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
ग्रामीणों को जंगल नहीं जाने की अपील
नवजात शावक और उसकी मां की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों से जंगल की ओर नहीं जाने की अपील की है। विभाग ने लोगों को हाथियों के दल से दूरी बनाए रखने और किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचने की समझाइश दी है। वन विभाग की टीम हाथियों के दल की लगातार निगरानी कर रही है, ताकि शावक और उसकी मां को किसी तरह का खतरा न हो और इलाके में मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति भी पैदा न हो।
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11 हाथियों के दल में नन्हे शावक का जन्म
जानकारी के अनुसार, बाकारूमा रेंज के ससकोबा परिसर 99 पीएफ में करीब 11 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इसी दल में शामिल मादा हथिनी ने गणेश चतुर्थी के दिन शावक को जन्म दिया। शावक अपनी मां के साथ सुरक्षित है और हाथियों का दल फिलहाल जंगल के भीतर विचरण कर रहा है। शावक के जन्म की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है।
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मां और शावक पर वन विभाग की नजर
बाकारूमा रेंजर विष्णु मरावी ने बताया कि धरमजयगढ़ वन मंडल में लगातार हाथियों की मौजूदगी बनी हुई है। ऐसे में हाथियों के दल में नए शावक का जन्म महत्वपूर्ण है। वन विभाग का प्रयास है कि मां और शावक दोनों सुरक्षित रहें और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। हाथी मित्र दल के सदस्य भी क्षेत्र में सक्रिय हैं और ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की समझाइश दे रहे हैं।
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गणेश चतुर्थी पर खास संयोग
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन हाथी के शावक के जन्म की खबर सामने आने से यह संयोग और खास हो गया है। हाथी को भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में ग्रामीण और वन्यजीव प्रेमी शावक के जन्म को प्रकृति के लिए शुभ संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
ग्रामीणों को जंगल नहीं जाने की अपील
नवजात शावक और उसकी मां की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों से जंगल की ओर नहीं जाने की अपील की है। विभाग ने लोगों को हाथियों के दल से दूरी बनाए रखने और किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचने की समझाइश दी है। वन विभाग की टीम हाथियों के दल की लगातार निगरानी कर रही है, ताकि शावक और उसकी मां को किसी तरह का खतरा न हो और इलाके में मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति भी पैदा न हो।