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क्रूड में नए उबाल की आहट: 120 डॉलर पहुंच सकता है भाव, भारत पर बढ़ेगा महंगाई और आयात बिल का दबाव

Tue, 08 Sep 2026 10:34 AM IST
द बोनस बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: द बोनस Updated Tue, 08 Sep 2026 10:34 AM IST
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Signs of fresh surge in crude oil Prices India may face increased pressure from inflation and import bill
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala

वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर बड़े संकट की आहट सुनाई दे रही है। एक तरफ कच्चे तेल के निर्यातक देशों के संगठन ओपेक प्लस देशों ने अक्तूबर के लिए अपनी उत्पादन नीति में कोई बदलाव न करते हुए आपूर्ति बढ़ाने पर रोक लगा दी है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि यदि पश्चिम एशिया में जहाजों पर हमले और बढ़े, तो कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल सकता है।

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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 96.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। घरेलू बाजार एमसीएक्स पर कच्चे तेल की कीमत करीब एक फीसदी उछलकर सोमवार को 8,774 रुपये प्रति बैरल रही।
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सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ओमान सहित 7 प्रमुख सदस्य देशों की रविवार को हुई बैठक में फैसला लिया गया कि नए उत्पादन कोटे तय होने तक उत्पादन नीति यथावत रखी जाएगी। अगस्त में ओपेक समूह ने सितंबर के लिए उत्पादन बढ़ाने की मंजूरी दी थी, जिससे 2023 में लागू की गई 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती की चरणबद्ध वापसी पूरी हो चुकी है। हालांकि, जारी ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की आवाजाही में आ रही रुकावटों ने भौतिक तेल बाजार और कीमतों पर ओपेक देशों के प्रभाव को सीमित कर दिया है। 
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97.93 डॉलर तक पहुंचा कच्चे तेल का दाम
उधर, कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को छह सप्ताह के उच्च स्तर पर बनी रहीं। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.1% गिरकर 96.19 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। कारोबार के दौरान यह 97.93 डॉलर तक पहुंच गया।

गैस और पेट्रोलियम की आपूर्ति में ज्यादा जोखिम
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया के प्रमुख जलमार्गों में व्यापारिक जहाजों पर हमले और तेज होते हैं, तो कच्चा तेल उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। हालांकि, यदि क्षेत्रीय तेल निर्यात सामान्य बना रहता है, तो निवेश बैंक ने 80 डॉलर प्रति बैरल का निचला परिदृश्य भी आंका है। ग्लोबल कमोडिटीज रिसर्च विभाग के अनुसार, कच्चे तेल की तुलना में यूरोपीय गैस और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों में आपूर्ति व्यवधान का जोखिम कहीं अधिक है। बैंक ने निवेशकों को गैस और डीजल में लॉन्ग पोजीशन लेने की सलाह दी है।

चालू खाता घाटे में वृद्धि रुपया होगा कमजोर
भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल और लगभग आधी प्राकृतिक गैस आयात करता है। यदि तेल की कीमतें बढ़ीं तो इसका सबसे सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ेगा। इससे चालू खाता घाटा तेजी से बढ़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये  पर भारी दबाव देखने को मिलेगा।

  • ओपेक प्लस के उत्पादन न बढ़ाने के रुख से बाजार में अतिरिक्त तेल की कमी बनी रहेगी। कच्चे तेल  ऊपर जाने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलने की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

परिवहन लागत में भी होगा इजाफा

  • इसके अलावा, ट्रांसपोर्टेशन लागत में तेज इजाफा होगा, जिसका सीधा असर खाद्य और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। इससे देश में थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर महंगाई दर में नए सिरे से उछाल आने का खतरा पैदा हो जाएगा। तेल खरीद के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे और विदेशी मुद्रा कमी होगी।
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