फ्रांस में स्कूलों की स्थिति को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन अब महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और सार्वजनिक सेवाओं के मुद्दे पर व्यापक विरोध में बदल गए हैं। हिंसा और कई शहरों में कर्फ्यू के बीच भारत ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने तथा प्रदर्शन वाली जगहों से दूर रहने की सलाह दी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सप्ताहांत की हिंसा में 2,400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और करीब 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए। फ्रांस में शनिवार को फिर रैलियां होने वाली हैं, जबकि ट्रेड यूनियनों ने पांच नवंबर को हड़ताल का एलान किया है।
फ्रांस में जारी हिंसक प्रदर्शनों और कई शहरों में कर्फ्यू के बीच भारत ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पेरिस स्थित भारतीय दूतावास ने फ्रांस में रह रहे भारतीयों और वहां यात्रा करने की तैयारी कर रहे लोगों से सावधानी बरतने को कहा है। दूतावास ने प्रदर्शन वाली जगहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने के साथ स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
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भारतीय दूतावास ने क्या-क्या कहा?
दूतावास ने बुधवार को जारी एडवाइजरी में कहा कि फ्रांस के कुछ इलाकों में लगाए गए कर्फ्यू को देखते हुए भारतीय नागरिक सतर्क रहें। उन्हें स्थानीय समाचारों और फ्रांस सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए हालात की जानकारी लेते रहने की सलाह दी गई है।
दूतावास की प्रमुख सलाह
प्रदर्शन वाली जगहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। फ्रांस सरकार की आधिकारिक वेबसाइट gouvernement.fr पर जारी सूचनाओं से हालात की जानकारी लेते रहें।
पेरिस क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए आरएटीपी की वेबसाइट देखें। आपात स्थिति में पेरिस स्थित भारतीय दूतावास या मार्सिले स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क करें।
फ्रांस में विरोध प्रदर्शन की वजह क्या?
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फ्रांस में सितंबर के आखिरी दिनों में छात्रों ने स्कूलों की खराब स्थिति, पर्याप्त संसाधनों की कमी और कक्षाओं में भीड़भाड़ के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए थे। धीरे-धीरे यह आंदोलन व्यापक हो गया। महंगाई, बढ़ती जीवनयापन लागत और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी चिंताओं को लेकर सरकार के खिलाफ भी विरोध तेज हो गया। प्रदर्शनों के दौरान लूटपाट, आगजनी और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं।
किन शहरों में कर्फ्यू लगा?
17 अक्तूबर को प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने के बाद अधिकारियों ने पेरिस के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगाया। लिली, लियोन और नीस में भी स्थानीय स्तर पर कर्फ्यू लगाया गया, जबकि मार्सिले में सभाओं और प्रदर्शनों पर पाबंदियां लगाई गईं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सप्ताहांत के दौरान हुई हिंसा में 2,400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं हिंसा के दौरान करीब 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए।
फ्रांस के प्रमुख छात्र संघ और येलो वेस्ट आंदोलन ने शनिवार को रैलियां निकालने का आह्वान किया है। येलो वेस्ट आंदोलन ने 2018 और 2019 में ईंधन की कीमतों के खिलाफ बड़े प्रदर्शन किए थे, जिनका असर पूरे देश में देखने को मिला था। इसके अलावा, ट्रेड यूनियनों ने महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती के विरोध में पांच नवंबर को हड़ताल का एलान किया है।