मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपनी सबसे एडवांस्ड लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल खोर्रमशहर-4 को एक अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी में तैनात कर दिया है। इजरायली मीडिया ने ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी के हवाले से यह जानकारी दी है। यह तैनाती ऐसे वक्त पर हुई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता चल रही है और दूसरी ओर संभावित अमेरिकी या इजरायली हमले की आशंकाएं भी बनी हुई हैं।
ईरान का यह कदम साफ संकेत देता है कि तेहरान बातचीत की मेज पर बैठते हुए भी अपनी सैन्य तैयारियों में कोई ढील देने के मूड में नहीं है। IRGC का यह कदम खासतौर पर इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल के महीनों में संगठन की रणनीति डिफेंसिव रुख से निकलकर अधिक आक्रामक पोजीशन की ओर बढ़ती दिख रही है।
क्या है खोर्रमशहर-4 की ताकत
प्रेस टीवी के मुताबिक, खोर्रमशहर-4 मिसाइल की रेंज 2,000 किलोमीटर है, यानी यह ईरान से इजरायल और पश्चिम एशिया के कई अहम सैन्य ठिकानों तक पहुंच सकती है। यह मिसाइल 1,500 किलोग्राम तक का वॉरहेड ले जाने में सक्षम है, जो इसे ईरान की सबसे भारी ऑपरेशनल बैलिस्टिक मिसाइलों में शामिल करता है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस मिसाइल की रिपोर्टेड सटीकता लगभग 30 मीटर है, जो किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। इसकी रफ्तार वायुमंडल के बाहर मैक 16 और वायुमंडल के भीतर मैक 8 तक पहुंचती है। इतनी तेज गति की वजह से एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने का समय बेहद कम मिल पाता है।
एयर डिफेंस के लिए बड़ी चुनौती
खोर्रमशहर-4 को आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। इसमें मैन्युवरेबल री-एंट्री व्हीकल (MaRV), मिड-कोर्स गाइडेंस, कम रडार क्रॉस-सेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के खिलाफ उच्च प्रतिरोध जैसी खूबियां शामिल हैं। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इन सभी विशेषताओं का कॉम्बिनेशन इसे अमेरिका और इजरायल के मिसाइल-डिफेंस नेटवर्क के लिए गंभीर चुनौती बना देता है।
इसी वजह से यह मिसाइल बीते साल इजरायल के खिलाफ हुए संघर्ष के दौरान ईरान के लिए बेहद कारगर साबित हुई थी। अब इसे अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी में तैनात करना ईरान की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह अपने हथियारों को हमले से सुरक्षित रखते हुए तुरंत जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनाए रखना चाहता है।
बातचीत के साथ ताकत का प्रदर्शन
IRGC के पॉलिटिकल डिप्टी ने अल-मयादीन न्यूज नेटवर्क से बातचीत में कहा कि खोर्रमशहर-4 का अनावरण और तैनाती ईरान की अपनी रक्षा शक्ति को बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कूटनीतिक बातचीत में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं से समझौता करेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में परमाणु वार्ता हो रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, यह बैठक शुक्रवार सुबह 10 बजे शुरू हुई। अमेरिकी अधिकारियों ने भी बातचीत की पुष्टि की है, हालांकि इससे पहले वार्ता के खतरे में पड़ने की खबरें सामने आ चुकी थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि खोर्रमशहर-4 की तैनाती सिर्फ सैन्य कदम नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है अमेरिका और उसके सहयोगियों को यह दिखाने का प्रयास कि ईरान दबाव में आकर अपने सामरिक विकल्प नहीं छोड़ेगा। बातचीत जारी है, लेकिन मिसाइलें भी पूरी तरह तैयार हैं यही इस तैनाती का असली संदेश माना जा रहा है।