भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में रही अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) का फ्रेमवर्क सामने आने के बाद तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो गई है। शनिवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने इस डील के अहम बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए साफ किया कि भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी सेक्टर से कोई समझौता नहीं किया है, जबकि अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर कई अहम उत्पादों में जीरो टैरिफ की पेशकश की है।
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अमेरिका ने भारत से जाने वाले कई उत्पादों पर 0 फीसदी ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। इससे भारतीय निर्यातकों, खासकर MSME सेक्टर, किसानों, मछुआरों और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के लिए अमेरिका का करीब 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का विशाल बाज़ार खुलने जा रहा है।
इन भारतीय उत्पादों पर अमेरिका का जीरो टैरिफ
सरकार के मुताबिक, अमेरिका ने जिन वस्तुओं पर भारत के लिए जीरो टैरिफ लागू किया है, उनमें जेम्स एंड ज्वैलरी, डायमंड, जेनेरिक फार्मा, स्मार्टफोन, स्पाइसेज, चाय-कॉफी, नारियल और नारियल तेल, वेजिटेबल ऑयल, काजू, कई फल और सब्जियां शामिल हैं।
इसके अलावा केला, आम, अनानास, मशरूम, वेजिटेबल रूट्स, कोको और कोको से बने उत्पाद, प्रोसेस्ड फ्रूट्स जैसे अमरूद जैम, एयरक्राफ्ट पार्ट्स, मशीनरी पार्ट्स, प्लैटिनम कॉइन्स, एसेंशियल ऑयल, एल्यूमिनियम पार्ट्स, जिंक ऑक्साइड, मिनरल्स, नेचुरल रबर जैसी वस्तुओं पर भी अमेरिका ने टैरिफ पूरी तरह खत्म करने का फैसला किया है।
सरकार का दावा है कि इससे भारत के एक्सपोर्ट में तेज उछाल आएगा और लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिनका सीधा फायदा महिलाओं और युवाओं को मिलेगा।
कृषि और डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित
इस डील को लेकर सबसे बड़ा सवाल किसानों और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा को लेकर था। इस पर वाणिज्य मंत्री ने दो टूक कहा कि भारत ने अमेरिका को किसी भी डेयरी उत्पाद पर कोई छूट नहीं दी है।
उन्होंने बताया कि मीट, पोल्ट्री, दूध, पनीर, चीनी, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, रागी, अमरनाथ, फल, ग्रीन टी, कोको, चना, एनिमल सीड्स प्रोडक्ट्स, नॉन-एल्कोहलिक प्रोडक्ट्स, इथेनॉल और तंबाकू जैसे संवेदनशील उत्पादों पर किसी तरह की रियायत नहीं दी गई है। सरकार के मुताबिक, यह फैसला किसानों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
टैरिफ 50% से घटकर 18%
इस अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए औसत टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है। यह भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। टेक्सटाइल, कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी सेक्टर को इससे सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
सेक्शन 232 में राहत और टेक्नोलॉजी सहयोग
सरकार ने बताया कि भारत को सेक्शन 232 के तहत एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर छूट मिलेगी। साथ ही ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ रेट कोटा और जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स पर अमेरिका के साथ बातचीत के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं।
डील के तहत भारत और अमेरिका टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स के व्यापार को भी तेजी से बढ़ाएंगे। इसमें GPU, डेटा सेंटर इक्विपमेंट और एडवांस टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। दोनों देश जॉइंट टेक्नोलॉजी सहयोग को विस्तार देने पर भी सहमत हुए हैं।
भारत करेगा 500 अरब डॉलर की खरीद
इस फ्रेमवर्क के तहत भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के एनर्जी प्रोडक्ट्स, एयरक्राफ्ट, एयरक्राफ्ट पार्ट्स, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोल खरीदने का इरादा जताया है।
इसके साथ ही दोनों देश नॉन-टैरिफ बाधाओं, डिजिटल ट्रेड में रुकावटों और सप्लाई चेन की मजबूती को लेकर भी मिलकर काम करेंगे। सरकार का कहना है कि यह समझौता तुरंत लागू किया जाएगा और भविष्य में एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में यह बड़ा कदम साबित होगा।