चंपावत। मां वाराही धाम देवीधुरा की भीम शिला का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व है। भीम शिला के संदर्भ में कई मान्यताएं भी हैं। वाराही मंदिर के पीठाचार्य कीर्ति बल्लभ जोशी का कहना है कि अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहां वास किया। मान्यता है कि एक बार जब पांडव शिला पर बैठ कर चौपड़ खेल रहे थे, तब उनके साथ मां वाराही एक ग्वालन के रूप में बैठी हुई थी। इसी बीच भीम को किसी बात पर क्रोध आया तो ग्वालन भीम का क्रोध देखकर इसी शिला के भीतर समा गई। माना जाता है कि तब भीम ने ग्वालन की तलाश में अपनी तलवार से शिला को बीच से काटकर दो हिस्सों में बांट दिया लेकिन भीम यह भूल गए कि उस समय शिला पर उनके भाई भी बैठे हैं। जब शिला दो भागों में कट कर गिरने लगे तो भीम ने एक बड़ी शिला के कटे हुए दोनों हिस्सों के ऊपर रख दिया, जिससे शिला गिरने से बच गई।