धरने को संबोधित करते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि प्रस्तावित ई-रजिस्ट्री व्यवस्था केवल अधिवक्ताओं के हितों के खिलाफ नहीं है, बल्कि स्टाम्प वेंडरों, दस्तावेज लेखकों, मुंशियों, टाइपिस्टों और उनसे जुड़े हजारों कर्मचारियों की आजीविका पर भी सीधा असर डालेगी। उनका कहना था कि वर्तमान स्वरूप में ई-रजिस्ट्री लागू होने से हजारों परिवार आर्थिक संकट में आ जाएंगे। उन्होंने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।