वीकेंड पर राधारानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी तो बरसाना में सड़क से लेकर मोबाइल नेटवर्क तक व्यवस्था चरमरा गई। राणा वाली प्याऊ से रंगीली महल, पीली कोठी चौराहा, नया बस स्टैंड, गोवर्धन रोड, मंदिर मार्ग, यादव मोहल्ला और प्रिय कुंड पुल तक वाहनों का दबाव रहा। इसी बीच मोबाइल नेटवर्क फेल होने से श्रद्धालु अपनों से संपर्क नहीं कर सके। भीड़ में बिछड़े लोग मोबाइल हाथ में लिए पूरे कस्बे में अपने परिजनों को तलाशते नजर आए। स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब 20 साल पहले बरसाना में जितनी आबादी और श्रद्धालु आते थे, उसी के हिसाब से मोबाइल नेटवर्क की क्षमता विकसित हुई थी। आज आबादी और श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन नेटवर्क क्षमता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। वीकेंड पर भीड़ बढ़ते ही कॉल मिलना मुश्किल हो जाता है और इंटरनेट भी जवाब दे जाता है।इसका असर व्यापार पर भी पड़ रहा है। व्यापारी शिव कुमार अग्रवाल ने बताया कि नेटवर्क फेल होने से ग्राहक संपर्क नहीं कर पाते और डिजिटल भुगतान में भी परेशानी आती है। बाहर से आए श्रद्धालु अपनों से बिछड़ जाएं तो उन्हें तलाशना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि करीब 20 साल पुरानी नेटवर्क क्षमता से आज की बढ़ती भीड़ को संभालना मुश्किल है, मोबाइल कंपनियों को क्षमता बढ़ानी चाहिए। स्थानीय निवासी दिनेश सेठ ने कहा कि वीकेंड पर जाम और नेटवर्क फेल होने से लोगों की परेशानी दोगुनी हो जाती है। परिवार के लोग बिछड़ जाते हैं और फोन नहीं मिलने पर उन्हें पूरे कस्बे में तलाशना पड़ता है। बरसाना की आबादी और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई, लेकिन नेटवर्क व्यवस्था उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। इसका स्थायी समाधान होना चाहिए।स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसाना अब दो दशक पहले वाला कस्बा नहीं रहा। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ यातायात और संचार व्यवस्था को भी उसी अनुपात में मजबूत करने की जरूरत है।