अयोध्या के रुदौली में गणेश चतुर्थी पर पूजा-अर्चना और प्रतिमा विसर्जन को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रेछघाट स्थित गोमती नदी में इस बार गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का कोई कार्यक्रम नहीं होगा। गोमती तट तक जाने वाले मार्ग में कटान होने के कारण कामाख्या मंदिर के पीछे बने गोमती नदी के घाट पर ही विसर्जन कराया जाएगा। शनिवार को एसडीएम विनोद कुमार गुप्ता और सीओ अरविंद सोनकर ने रैछघाट और कामाख्या घाट का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। एसडीएम विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी पर पूजा-अर्चना और 15 सितंबर को प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। क्षेत्र में करीब एक दर्जन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रैछघाट पर विसर्जन का कोई कार्यक्रम नहीं रखा गया है। यहां गोमती तट तक जाने वाले मार्ग में कटान होने के कारण आवागमन सुरक्षित नहीं है। इसी को देखते हुए कामाख्या मंदिर के पीछे बने गोमती नदी के घाट को विसर्जन के लिए निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि विसर्जन पूरी तरह प्रशासन की देखरेख में कराया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था के पूरे इंतजाम रहेंगे। प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था की जाएगी और नाव पर लाइफ जैकेट उपलब्ध रहेंगे। विसर्जन करने वाली समिति का एक सदस्य ही नाव पर सवार होकर प्रतिमा विसर्जन स्थल तक जाएगा। किसी भी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए प्रशासन की ओर से निगरानी रखी जाएगी। एसडीएम ने बताया कि प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान गोताखोरों की भी मदद ली जाएगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए घाट पर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा विसर्जन स्थल पर आवश्यक सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए जाएंगे। सीओ अरविंद सोनकर के साथ निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने घाट की स्थिति, आवागमन के रास्ते और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को विसर्जन से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं।