अयोध्या के रुदौली तहसील क्षेत्र में सरयू नदी के जलस्तर में अब धीरे-धीरे कमी आने लगी है। नदी का पानी घटने से बाढ़ प्रभावित तराई क्षेत्र के लोगों को कुछ राहत मिली है, लेकिन जलभराव के कारण पशुपालकों के सामने पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है। खेतों और आसपास के इलाकों में पानी भरा होने से हरे चारे की उपलब्धता प्रभावित हुई है। पशुओं के चारे की समस्या को देखते हुए तहसील प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिया है। एसडीएम विनोद कुमार गुप्ता के निर्देश पर तराई क्षेत्र के सडरी, पसैया, मरौचा और पटरंगा माझा गांवों में 240 किसानों को पशुओं के लिए भूसा उपलब्ध कराया जा रहा है। संबंधित लेखपालों के माध्यम से जरूरतमंद किसानों तक भूसा पहुंचाया जा रहा है। वहीं, ग्रामीणों और किसानों ने पशुओं में बीमारी फैलने की आशंका को लेकर चिंता जताई है। किसानों का आरोप है कि बाढ़ और जलभराव के बाद पशुओं में गला घोंटू और बुखार जैसी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। इसके बावजूद पशु विभाग की ओर से गांवों में पशुओं का टीकाकरण नहीं कराया जा रहा है। किसानों का कहना है कि समय रहते टीकाकरण अभियान चलाया जाए, जिससे पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाया जा सके। बाढ़ के कारण कई इलाकों में पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे में प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा भूसा पशुपालकों के लिए राहत का जरिया बना है। ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं के लिए चारे के साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण भी जरूरी है। तहसील प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों में पशुओं के चारे की उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है। संबंधित लेखपालों को जरूरतमंद किसानों तक राहत पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि आवश्यकता के अनुसार अन्य प्रभावित गांवों में भी भूसे की व्यवस्था कराई जाएगी। ग्रामीणों ने पशु विभाग से बाढ़ प्रभावित तराई क्षेत्र में विशेष टीकाकरण अभियान चलाने और पशु चिकित्सकों की टीम भेजकर पशुओं की जांच कराने की मांग की है। इससे बीमारी फैलने की आशंका को समय रहते नियंत्रित किया जा सकेगा।