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सावन: राजा भीष्मक की नगरी में गंगोत्री के जल से होता है 5000 वर्ष पुराने बाबा भयानक नाथ का जलाभिषेक

पुरहा नदी के पावन तट पर स्थित बाबा भयानक नाथ मंदिर सावन मास में शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यताओं और मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यह प्राचीन शिवधाम करीब पांच हजार वर्ष पुराना माना जाता है। पूरे सावन में यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से गूंज उठता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुदरकोट का संबंध प्राचीन काल में राजा भीष्मक की नगरी से माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा भयानक नाथ के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के चलते औरैया ही नहीं, आसपास के कई जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, सावन में अनेक कांवड़िये गंगोत्री, गोमुख, हरिद्वार और अन्य पवित्र तीर्थों से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए बाबा भयानक नाथ धाम पहुंचते हैं। मान्यता है कि गंगोत्री के पवित्र जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

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