माडवी हिडमा, जो सीपीआई (माओवादी) का केंद्रीय समिति सदस्य और पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) बटालियन नंबर 1 का कमांडर था, मंगलवार, 18 नवंबर 2025 को सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया। यह एनकाउंटर आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के त्रि-जंक्शन के पास मारेदुमिल्ली के घने जंगल क्षेत्र में हुआ। खुफिया एजेंसियों द्वारा लगभग 34 घंटे तक हिडमा की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने के बाद, ग्रेहाउंड्स और अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों के नेतृत्व में यह ऑपरेशन शुरू किया गया था। यह मुठभेड़ चार घंटे से अधिक समय तक चली और मंगलवार सुबह करीब 6 बजे समाप्त हुई, जिसके परिणामस्वरूप हिडमा, उसकी पत्नी राजे (राजक्का) और चार अन्य माओवादियों सहित कुल छह नक्सली मारे गए। हिडमा पर ₹1 करोड़ से अधिक का इनाम था और वह 2010 के दंतेवाड़ा हमले (जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे) और 2013 के झीरम घाटी हमले सहित 26 से अधिक बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड था। उसकी मौत को 'लाल आतंक' के खात्मे की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऑपरेशन में शामिल सुरक्षा बलों को सफलतापूर्वक हिडमा को मार गिराने के लिए बधाई दी। उन्होंने हिडमा को खत्म करने के लिए 30 नवंबर की समय सीमा निर्धारित की थी, और यह कार्रवाई इस समय सीमा से 12 दिन पहले पूरी हो गई।
आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) हरीश कुमार गुप्ता ने पुष्टि की कि माओवादी केंद्रीय समिति सदस्य माडवी हिडमा और उसकी पत्नी राजे मुठभेड़ में मारे गए हैं। उन्होंने बताया कि हिडमा अपने छह सदस्यीय दल के साथ छत्तीसगढ़ से आंध्र प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। डीजीपी ने पुष्टि की कि घटनास्थल से AK-47 राइफलें और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की गई हैं।
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस घटना को एक अत्यंत महत्वपूर्ण विकास बताया और पुष्टि की कि मारे गए कैडरों में माओवादी नेता हिडमा भी शामिल है।
सुरक्षा अधिकारियों ने यह भी बताया कि हिडमा के मारे जाने से बटालियन नंबर 1 कमजोर होगी, और इससे नक्सल विरोधी अभियानों को बढ़ावा मिलेगा और नक्सलियों के आत्मसमर्पण की संभावना बढ़ेगी।