SP क्राइम अवनीश मिश्रा ने बताया, "थाना साइबर क्राइम ने साइबर ठगों के एक गैंग को पकड़ा जिसमें 4 पुरुष और एक महिला है। उनके कब्जे से 9 एटीएम कार्ड 12 बैंक के पासबुक, SIM, आधार कार्ड और PAN कार्ड बरामद किए गए हैं। दिसंबर के महीने में एक वृद्ध महिला को डिजिटल अरेस्ट करके इन्होंने खातों में 2 करोड़ 4 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए थे... महिला के साथ ठगी के 46 लाख रुपए हमने खाते में होल्ड करा लिया है। एक अभियुक्त अभी फरार है जिसे जल्द से जल्द गिरफ्तार करेंगे। हम कोशिश करेंगे महिला के सभी पैसे वापस आ जाएं।
मथुरा साइबर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट नामक बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक बड़े अपराधी गैंग को पकड़ा है, जिसने न केवल स्थानीय बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर लोगों को लाखों रुपये का चूना लगाया था। इस गिरोह ने अपने अपराध को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अंजाम दिया, जिसमें लोगों को फोन पर यह झूठ बताया जाता था कि उनके नाम से किसी गंभीर अपराध (जैसे आतंकवाद या धोखाधड़ी) में उनका नाम जुड़ गया है और यदि उन्होंने तुरंत पैसे नहीं दिए तो उन्हें और उनके परिवार को गंभीर कानूनी मुश्किलों में फँसा दिया जाएगा। पुलिस की पूछताछ और जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने बुजुर्गों और अन्य व सरल लोगों को डराने-धमकाने के लिए हांगकांग स्थित नंबरों और इंटरपोल के नाम का इस्तेमाल किया, जिससे एक 75 साल की बुज़ुर्ग महिला तक को लगभग 2 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया था।
पुलिस ने इस केस में कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है। आरोपियों के खिलाफ मामला IT Act और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। इस गिरोह ने फर्जी फोन कॉल, धोखाधड़ी भरे संदेश और झूठे अधिकारियों के रूप में वीडियो कॉल का सहारा लिया था ताकि पीड़ितों को डराया-धमकाया जा सके और उनसे बैंक ट्रांजैक्शन करवा लिए जाएँ। गिरफ्तार आरोपियों ने अपने जुर्म को कबूल भी कर लिया है और पुलिस ने गिरोह के लगभग 46 लाख रुपये भी जब्त किए हैं जो अभी बरामद किये गये फ्रॉड क़र्ज़ की रकम का हिस्सा हैं।
इस गिरोह की खास बात यह है कि यह इंटरस्टेट नेटवर्क के रूप में काम करता था, जिसका मुख्य आरोपी एमडी विश्नोई फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के अन्य सदस्यों का संबंध आगरा, राजस्थान और मथुरा से था और गिरोह लंबे समय से साइबर फ्रॉड के कई मामलों में शामिल था। मथुरा साइबर क्राइम यूनिट ने शिकायतों की जांच के बाद डिजिटल ट्रांसफर और बैंक दस्तावेजों के साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों का पता लगाया। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज, पहचान दस्तावेज, सिम कार्ड और बैंक से जुड़े कागजात भी बरामद किए हैं, जिनसे पता चलता है कि गिरोह ने कई और लोगों को अपने जाल में फँाया था।
पुलिस ने इस खुलासे को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता बताया है और लोगों को ऐसी धोखाधड़ी से सावधान रहने की चेतावनी दी है। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब स्थानीय प्रशासन जागरूकता अभियानों और सख्त जांच को और तेज कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसे गिरोहों को पहले ही पकड़ा जा सके और आम जनता को सुरक्षित रखा जा सके।