महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ता अभिजीत डिपके के परिवार ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। अभिजीत डिपके की दादी के निधन के बाद परिवार का दर्द सामने आया है। उनकी मां अनीता डिपके ने भावुक होते हुए कहा कि यदि दिल्ली पुलिस उनके बेटे को समय रहते जाने देती, तो वह अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल हो पाता। परिवार के अनुसार, अभिजीत को मुंबई से हिंगोली पहुंचना था, जहां वह अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने वाला था। लेकिन कथित तौर पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के कारण वह समय पर अपने घर नहीं पहुंच सका। इस घटना ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। एक तरफ परिवार अपनी बुजुर्ग सदस्य को खोने के गम से गुजर रहा था, वहीं दूसरी तरफ अभिजीत के अंतिम संस्कार में शामिल न हो पाने की बात ने उनकी पीड़ा को और बढ़ा दिया।
अभिजीत डिपके की मां अनीता डिपके ने दिल्ली पुलिस से जुड़े घटनाक्रम पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “दिल्ली पुलिस को उसे पहले ही जाने देना चाहिए था। असल में उसे कल रात ही मुंबई से यहां पहुंचना था। उसे सीधे यहां आना था, ताकि वह अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल हो सके। अगर उन्होंने उसे कल ही छोड़ दिया होता, तो वह अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल हो पाता।” उनके इस बयान से परिवार की भावनात्मक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। मां का कहना है कि परिवार में हुई इस दुखद घटना को देखते हुए पुलिस को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों में थोड़ी नरमी दिखाई जाती, तो परिवार को कुछ राहत मिल सकती थी। अनीता डिपके के मुताबिक, दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होना अभिजीत और उसके परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण था, लेकिन परिस्थितियों के कारण वह यह अवसर खो बैठा।
अनीता डिपके ने आगे कहा कि परिवार पहले से ही अपने प्रियजन के निधन के कारण दुखी था और ऐसे समय में अभिजीत का अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाना उनकी परेशानी को और बढ़ाने वाला रहा। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए अभिजीत को जाने देने पर विचार किया जा सकता था। परिवार की मुख्य शिकायत यही है कि यदि उसे समय पर जाने की अनुमति मिल जाती, तो वह अपनी दादी को अंतिम विदाई दे पाता। इस पूरे मामले में मां के बयान ने पुलिस की कार्रवाई और ऐसी परिस्थितियों में मानवीय संवेदनशीलता की भूमिका को लेकर चर्चा खड़ी कर दी है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की पूरी परिस्थितियों, अभिजीत डिपके को रोके जाने के कारणों और पुलिस के आधिकारिक पक्ष की पुष्टि नहीं होती है। इसलिए इस मामले से जुड़े सभी तथ्यों को समझने के लिए पुलिस का आधिकारिक बयान और घटनाक्रम का पूरा विवरण सामने आना आवश्यक है। फिलहाल, अनीता डिपके के बयान से यह स्पष्ट है कि परिवार को बेटे के अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल न हो पाने का गहरा दुख है। परिवार चाहता है कि ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में संबंधित अधिकारियों द्वारा मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि किसी व्यक्ति को अपने परिजन को अंतिम विदाई देने के अवसर से वंचित न होना पड़े।