कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण के दौरान मौजूद किसान।
अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर में प्राकृतिक खेती विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों की जानकारी देकर खेती की लागत कम करना और रसायनमुक्त एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना रहा।
डॉ. नवल किशोर सिंह ने प्राकृतिक खेती में गो पालन से प्राप्त उपयोगी सूक्ष्म जीवों के महत्व की जानकारी देते हुए बीजामृत, जीवामृत और घनजीवामृत तैयार करने की विधि बताई। किसानों ने स्वयं जीवामृत तैयार कर इसकी व्यावहारिक जानकारी हासिल की। विषय वस्तु विशेषज्ञ हरीश जोशी ने नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क और खट्टी लस्सी से कीट एवं रोग प्रबंधन की जानकारी दी। किसानों को कीट नियंत्रण के लिए कुरमुला लाइट ट्रैप और डब्ल्यूजीपीएसबी-2 पाउडर भी वितरित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण कराया गया। इनमें फसल, चारा, डेयरी, वर्मीकंपोस्ट, अजोला, मुर्गी, मत्स्य-सह-बत्तख और सब्जी पौध नर्सरी इकाइयां शामिल रहीं। किसानों को कृमिनाशक दवा, शीताघास और रोड्स घास के पौधे भी वितरित किए गए। पांच चयनित किसानों को जीवामृत तैयार करने के लिए ड्रम, बाल्टी और मग दिए गए। वहीं 400 फूलगोभी, 400 पत्तागोभी और 200 ब्रोकली के पौधे वितरित किए गए। केवीके अध्यक्ष डॉ. राज कुमार ने प्राकृतिक खेती को समय की मांग बताते हुए किसानों से इसे अपनाने का आह्वान किया। प्रगतिशील किसान मनोज कोरंगा ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का आयोजन केवीके काफलीगैर और आत्मा परियोजना कृषि विभाग बागेश्वर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।