यूपी के सीतापुर में शुक्रवार सुबह बारिश के कारण कच्ची दीवार भरभराकर गिर गई। मलबे में दबकर आठ बकरियों की मौत हो गई, जबकि चार बकरियां घायल हो गईं। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से मलबा हटवाकर बकरियों को बाहर निकलवाया।
घटना कमलापुर थाना क्षेत्र के कुसमौरा गांव की है। बताया गया कि सुबह करीब 9.30 बजे गांव निवासी पप्पू की कच्ची दीवार गिर गई। मलबे में रामप्रसाद पुत्र गोकरन की 12 बकरियां दब गई थीं। सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक कमलापुर पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से मलबा हटाया गया। इसमें आठ बकरियों के शव मिले। जबकि, चार बकरियां घायल अवस्था में मिलीं।
पुलिस ने मृत बकरियों के पोस्टमार्टम तथा घायल बकरियों के उपचार के लिए पशु चिकित्सक को सूचना दी। साथ ही घटना की जानकारी एसडीएम सिधौली को भी दी गई है। पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
बारिश में तीन लोगों की जा चुकी है जान
लगातार हो रही बारिश क्षेत्र के कच्चे मकानों और जर्जर दीवारों के लिए खतरा बनी हुई है। थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में बारिश के दौरान कच्ची दीवारें ढहने से एक महिला, एक युवक और छह वर्षीय बालिका की मौत हो चुकी है।
ज्योतिशाह आलमपुर गांव में मायाराम पुत्र गोकुल के घर की कच्ची दीवार बारिश के दौरान ढह गई थी। मलबे में दबकर उनकी पत्नी ब्रजरानी (52) की मौत हो गई थी। वहीं गौरा गांव में कच्ची दीवार गिरने से नेकराम पुत्र बचनू (32) और छह वर्षीय लक्ष्मी पुत्री अमित की मलबे में दबकर मौत हो गई थी।
कई गांवों में मकान और दीवारें क्षतिग्रस्त
लगातार बारिश से क्षेत्र के कई गांवों में कच्चे मकान और दीवारें क्षतिग्रस्त हुई हैं। केवलपुर गांव में रामप्रसाद के पुत्र, संजय पुत्र शिवकुमार तिवारी और शंकर पांडेय पुत्र मुन्नूलाल पांडेय के घर की दीवारें भी बारिश में गिर गईं। गौरा गांव में राजेश पुत्र मुन्नीलाल, बचनू समेत कई ग्रामीणों के मकान भी प्रभावित हुए हैं।
हर बरसात में मंडराता है खतरा
कच्चे और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों पर हर बरसात में हादसे का खतरा बना रहता है। लगातार बारिश से कमजोर दीवारें कभी भी गिर सकती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से क्षेत्र में कच्चे और जर्जर मकानों का सर्वे कराने तथा खतरे वाले मकानों में रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है।
कच्चे मकानों का सर्वे कराने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश से क्षतिग्रस्त और जर्जर मकानों को चिह्नित कर उनका सर्वे कराया जाए। ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के साथ ही क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन कर पीड़ित परिवारों को नियमानुसार सहायता दिलाई जाए।