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Shahjahanpur News: सिर्फ रामगंगा खतरे के निशान से ऊपर

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जलालाबाद में गांव में पानी कम होने के बाद भरा कीचड़। संवाद - फोटो : Samvad
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शाहजहांपुर। जिले से होकर निकलने वाली सभी नदियों का जलस्तर कम होने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से पानी उतरने लगा है। सिर्फ रामगंगा अभी खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण तटीय गांवों में बाढ़ से बिगड़े हालात सामान्य नहीं हो सके हैं।
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शारदा नहर खंड के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार, रविवार रात आठ बजे की तुलना में सोमवार को शाम चार बजे तक कलान के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर छह सेमी घटकर 143.07 मीटर हो गया। गंगा खतरे के निशान से 58 सेमी नीचे आ गई है।
इसी तरह अल्हागंज क्षेत्र के डबरी घाट पर रामगंगा का जलस्तर दस सेमी कम होकर 137.68 मीटर हो गया है। इसके बावजूद रामगंगा अब भी खतरे के निशान से 38 सेमी ऊपर बह रही है। बताया गया कि शहर में गर्रा का जलस्तर 20 सेमी कम होने के बाद 146.20 मीटर हो गया है और वह खतरे के निशान से 2.60 मीटर नीचे आ गई है, लेकिन खन्नौत का जलस्तर दस सेमी घटकर 145.20 मीटर होने के बावजूद नदी खतरे के निशान से सिर्फ 55 सेमी नीचे बह रही है।
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रामगंगा के तटीय गांवों के संपर्क मार्गों पर शुरू हुआ आवागमन
जलालाबाद। रामगंगा और बहगुल नदियां उतार पर होने से गत एक सप्ताह से अवरुद्ध चल रहे विभिन्न गांवों को जाने वाले सभी चार रास्तों से सोमवार को आवागमन होने लगा। पानी कम होने की रफ्तार काफी धीमी होने से अभी ज्यादातर खेत और फसलें जलमग्न हैं। कसारी, बलदेवपुर, मंझारा आदि गांवों की जलमग्न रहने वाली बस्तियों में कीचड़ और गंदगी लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है।
तटीय गांवों के खेत अभी जलमग्न होने से जानवरों के लिए हरे चारे की कमी है। निचले क्षेत्र वाले घरों में भूसा भी भीग गया है। प्रभावित गांवों में सैकड़ों एकड़ तिल, उर्द, बाजरा, तोरई, लौकी, कद्दू, भिंडी आदि फसलें भी सड़ने के कगार पर पहुंच गई हैं। तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि पीड़ित परिवारों को राहत किटें बांटी जा रही हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जा रहे हैं। संवाद
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शमसाबाद हाईवे से उतरा गंगा का पानी
मिर्जापुर। गंगा की बाढ़ उतार पर आने से करीब दस दिन तक जलमग्न रहे जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे पर चौरा गांव के पास पानी उतर जाने से सोमवार सुबह से हाईवे पर यातायात शुरू हो गया, लेकिन तटीय गांवों के संपर्क मार्ग अब तक डूबे हुए हैं। कस्बे की दलित बस्ती और नई बस्ती में मुरादाबाद-फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे की पुलियों के रास्ते घुसा रामगंगा का पानी भी निकल चुका है, लेकिन निचले स्थानों पर बने मकानों के आसपास पानी भरा होने से वहां का जनजीवन अभी सामान्य नहीं हो सका है। पानी कम होने के बाद अब तटीय गांवों में बीमारियां भी फैलने लगी हैं। गंगा के तटवर्ती पैलानी उत्तर, इस्लामनगर, आजादनगर, मस्जिद नगला आदि गांवों के संपर्क मार्ग अब भी एक से दो फुट तक डूबे हुए हैं। पैलानी उत्तर के ग्रामीणों के अनुसार, गांव में बुखार, पेटदर्द, उल्टी-दस्त, खाज-खुजली आदि दूषित जलजनित रोग फैल रहे हैं। पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आदेश रस्तोगी ने बताया कि स्वास्थ्य टीम रोस्टर के अनुसार बाढ़ प्रभावित गांवों में जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं दे रही हैं।

बाढ़ की स्थिति सामान्य होने लगी है। स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित रहे क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ से डूबी फसलों का सर्वे भी कराया जाएगा।
-अरविंद कुमार, एडीएम एफआर

जलालाबाद में गांव में पानी कम होने के बाद भरा कीचड़। संवाद- फोटो : Samvad

जलालाबाद में गांव में पानी कम होने के बाद भरा कीचड़। संवाद- फोटो : Samvad

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