सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद सुबह पांच बजे ढहाए जाने पर असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले की है और धार्मिक आजादी किसी की रहम-ओ-करम पर निर्भर नहीं है।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को शनिवार सुबह पांच बजे ध्वस्त किए जाने के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। ओवैसी ने पूछा कि क्या अब मुसलमानों के लिए मजहबी आजादी का संवैधानिक अधिकार भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि इबादतगाहों पर बार-बार कमजोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोजर क्यों चलाया जाता है।
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#WATCH | Hyderabad, Telangana | On the demolition of illegal mosque in DM office complex (Saharanpur) after court upheld the order, AIMIM Chief Asaduddin Owaisi says, "... How could you demolish a mosque that has been active since 1911, a place where prayers have been offered… https://t.co/ZSBsUROOLgpic.twitter.com/OE4CHIdh3b
1911 के दस्तावेजों का ओवैसी ने किया जिक्र
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 के दस्तावेज पेश किए थे। उनके मुताबिक इन दस्तावेजों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की गई कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी।
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ओवैसी ने कहा कि एक सदी से अधिक समय से वहां लगातार नमाज होती रही है। उन्होंने कहा कि यह कोई हाल में बनाई गई इमारत नहीं थी, बल्कि लंबे समय से इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होती रही है।
वक्फ बाय यूजर और लिमिटेशन एक्ट का हवाला
ओवैसी ने अपने बयान में वक्फ बाय यूजर का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय से किसी स्थान के इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होने का भी कानूनी महत्व है। उन्होंने लिमिटेशन एक्ट का हवाला देते हुए सरकार की ओर से जमीन के दावे पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि जब किसी जमीन पर एक सदी से अधिक समय से खुले तौर पर और लगातार कब्जा रहा हो तो सरकार अचानक उसे नजरअंदाज कर यह नहीं कह सकती कि जमीन अब उसकी है। ओवैसी ने कहा कि इतने लंबे समय की काबिजी को देखते हुए प्रतिकूल कब्जे का सवाल भी उठता है।
'मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया'
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा,'मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया।' उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को मस्जिद दिखाई देने पर तकलीफ हो सकती है, लेकिन यह उनका मसला है।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि अपनी खुन्नस मिटाने के लिए किसी मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि धार्मिक आजादी किसी की रहम-ओ-करम पर निर्भर नहीं है।
'हमारी इबादतगाहों पर बुलडोजर क्यों?'
ओवैसी ने सवाल उठाया कि अगर किसी धार्मिक स्थल को लेकर विवाद है तो बार-बार इबादतगाहों पर बुलडोजर कार्रवाई क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक आजादी को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सहारनपुर की मस्जिद का मामला सिर्फ एक इमारत का मामला नहीं है, बल्कि इससे मजहबी आजादी और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवाल भी उठते हैं।