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मेरठ: 16,726 संपत्तियों पर कार्रवाई की तैयारी, विरोध में उतरे व्यापारी; सराफा बाजार में लगाए काले झंडे

Wed, 30 Sep 2026 11:45 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में 16,726 भवनों पर कार्रवाई की तैयारी के बीच व्यापारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। सराफा बाजार में काले झंडे लगाए गए हैं, जबकि मेडा री-सर्वे के बाद भवन स्वामियों को नोटिस देगा।
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मेरठ में सीलिंग के नोटिस को लेकर व्यापारियों ने लगाए काले झंडे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ शहर में 16,726 संपत्तियों और सेंट्रल मार्केट से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर संयुक्त व्यापार संघ ने बाजारों में काले झंडे लगाने का ऐलान किया है। मंगलवार को संगठन के पदाधिकारी इंदिरा चौक के पास काले झंडे खरीदने पहुंचे लेकिन दुकानदार ने इन्कार कर दिया। इस पर व्यापारियों ने उन्होंने नारेबाजी की। देर शाम सराफा बाजार में कई व्यापारियों ने खुद ही व्यवस्था कर अपने प्रतिष्ठान पर काले झंडे लगा दिए।

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संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने बताया कि दुकानदार ने मंगलवार को काले झंडे उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था लेकिन बाद में झंडे देने से इन्कार कर दिया। झंडा विक्रेताओं ने बताया कि पुलिस ने उन्हें काले झंडे बेचने से मना किया है। इसके बाद नवीन गुप्ता ने एडीएम सिटी और थाना अध्यक्ष कोतवाली को फोन कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

नवीन गुप्ता ने कहा कि अन्य स्थानों से काले झंडों की व्यवस्था की जा रही है और बुधवार को हर हाल में शहर के बाजारों में काले झंडे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए संगठन लगातार अपनी मांग उठा रहा है। इस दौरान मंत्री परविंदर त्यागी, विकास गिरधर, अपार मेहरा, संजीव जिंदल, सुधांशु पाराशर और बिल्लू त्यागी आदि व्यापारी मौजूद रहे।
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शासन-प्रशासन से नहीं, व्यापारियों को इंसाफ दिलाने की लड़ाई
संगठन महामंत्री संजय जैन ने कहा कि उनकी लड़ाई शासन या प्रशासन से नहीं है, बल्कि व्यापारियों को इंसाफ दिलाने के लिए है। व्यापारियों की समस्याओं को लेकर संगठन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहा है। कोषाध्यक्ष विजय आनंद अग्रवाल ने कहा कि पूरे शहर के व्यापारियों में भय का माहौल है। व्यापारियों को अपनी संपत्तियों और कारोबार के भविष्य को लेकर चिंता है।

उपाध्यक्ष तरुण गुप्ता ने कहा कि संगठन का उद्देश्य स्पष्ट है। आंदोलन व्यापारियों को न्याय दिलाने के लिए शुरू किया गया है और जब तक न्याय नहीं मिलता, व्यापारी शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रखते रहेंगे।
 

यह बोले व्यापारी... उजड़ जाएगा पूरा शहर
जोन ए में 16,726 संपत्तियों में ज्यादातर आवासीय संपत्ति हैं। पूरा शहर उजड़ जाएगा। ऐसे में सरकार को लोगों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।  -लोकेश रस्तोगी, व्यापारी

लोग बेघर हो जाएंगे
सिर्फ जोन ए में कार्रवाई से ही लाखों लोग बेघर हो जाएंगे। बड़ी संख्या में इन संपत्तियों में परिवार भी रह रहा है और कारोबार भी चल रहा है। -संजय सिंघल, प्लाईवुड व्यापारी

सरकार करे मदद
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को आगे आकर कार्य करना चाहिए। व्यापारियों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रशासन भी मदद के लिए आगे आए। -सुनील शर्मा, व्यापारी

गांव भी हैं जद में 
शहर में रह रहे लोगों के साथ शहर से चारों तरफ से सटे गांव भी इस आदेश के तहत कार्रवाई की जद में हैं। सभी को एकजुट होकर अपनी मांग सरकार तक पहुंचानी होगी। -पीयुष गर्ग, व्यापारी

सील भवनों के अनधिकृत निर्माण जल्द करें ध्वस्त
आवास एवं विकास परिषद कार्यालय में सेंट्रल मार्केट के सील किए गए भवन स्वामियों के साथ मंगलवार को बैठक हुई। सुप्रीम कोर्ट के 21 सितंबर को जारी आदेश से आवंटियों को अवगत कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि कुल 44 भवन सील किए गए थे। इनमें से 20 भवन स्वामियों ने अपना अनधिकृत निर्माण तोड़ दिया है।

हालांकि, 24 भवन स्वामियों ने इस दिशा में थोड़ी ही कार्रवाई की है। उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने आवंटियों को कोर्ट के आदेश का पालन करने को कहा। उन्हें जल्द-से-जल्द अनधिकृत निर्माण तोड़ने का निर्देश दिया गया। यह बैठक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। 

शहर में 16,726 भवनों को नोटिस देने की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने जोन-ए में चिह्नित 16,726 भवनों पर ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई से पहले उनके मालिकों को नोटिस देने की तैयारी शुरू कर दी है। 

कार्रवाई से पहले इन भवनों का री-सर्वे कराया जाएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन से भवन प्राधिकरण की स्थापना 1976 से पहले बने हैं और कौन से इसके बाद। मंगलवार को मेडा में अधिकारियों के बीच इसको लेकर मंथन हुआ। 

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ विकास प्राधिकरण को उल्देपुर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। आदेश के अनुपालन में प्राधिकरण ने जोन-ए में 16,726 भवनों की सूची तैयार की है। 

हालांकि इन सभी भवनों की वर्तमान स्थिति और उनके निर्माण की अवधि को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। इसी वजह से प्राधिकरण अब दोबारा सर्वे कराने की तैयारी कर रहा है। जोन-ए में सर्वे करने वाली प्राधिकरण की टीम से अधिकारियों ने जानकारी मांगी है कि भवनों को किस आधार पर चिह्नित किया गया है। 
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पहले होगी स्थिति की जांच
जोन-ए का अधिकांश हिस्सा मेरठ शहर में है। अंदेशा जताया जा रहा है कि करीब 80 प्रतिशत भवन वर्ष 1975 से पहले के बने हो सकते हैं। इसे लेकर भवन स्वामियों से भी पुराने दस्तावेज और रिकॉर्ड लेने पर मंथन हुआ है। इधर री-सर्वे शुरू होने से पहले मेडा भवन स्वामियों को नोटिस देगा। इसके जरिए उन्हें अपने भवन से संबंधित दस्तावेज और निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड तैयार रखने का मौका मिलेगा। 

री-सर्वे से पहले भवन स्वामियों को नोटिस दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन होगा। इस प्रकरण में मेरठ विकास प्राधिकरण के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। नियमानुसार कार्रवाई होगी।        - संजय कुमार मीणा, मेडा उपाध्यक्ष
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