भावनपुर थाने में तैनात हाथरस निवासी दो सिपाही प्रसन्नजीत और आशीष अपने हिस्ट्रीशीटर साथी साजिद और अन्य के साथ मिलकर लोगों को काफी समय से फंसा रहे थे। एसएसपी ने जांच के बाद दोनों को दोषी पाया और निलंबित कर दिया।
भावनपुर थाने में तैनात 2025 बैच के सिपाही हाथरस जनपद के टीकरी कलां निवासी प्रसन्नजीत और नंगला मेवा गांव निवासी आशीष, हिस्ट्रीशीटर ज्ञानपुर निवासी साजिद उर्फ पिस्टल के साथ मिलकर नकली नोट के नाम पर पीड़ितों से धोखाधड़ी का काम करते थे। आरोपी हिस्ट्रीशीटर दो साल पहले मुजफ्फरनगर में भी नकली नोट के मामले में जेल गया था। जेल से जमानत के बाद दोबारा से गैंग बनाकर काम शुरू कर दिया था। भावनपुर थाना पुलिस ने दोनों सिपाही व हिस्ट्रीशीटर के अलावा उसके दो साथी किनानगर निवासी फैजान और अभिषेक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सभी पांचों आरोपियों को कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया। एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही विभागीय जांच भी बैठा दी है।
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एसपी देहात अभिजीत कुमार के अनुसार, ग्राम जयसिंहपुर, मवाना निवासी इरशाद ने पांच अक्तूबर को भावनपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए बताया था कि वह ज्ञानपुर के जंगल में ट्यूबवेल के पास से गुजर रहा था। इसी दौरान बाइक सवार आरोपी हिस्ट्रीशीटर साजिद, फैजान व अभिषेक ने उसे रोक लिया। सूचना के बाद दोनों आरोपी सिपाही प्रसन्नजीत व आशीष भी मौके पर आ गए। आरोपियों ने सिपाहियों के साथ मिलकर उससे 50 हजार रुपये लूट लिए और उसे नकली नोटों की गड्डी दिखाते हुए जेल भेजने की धमकी दी। इसके बाद हिस्ट्रीशीटर व सिपाही वहां से चले गए।
पीड़ित ने मामले की जानकारी एसएसपी को दी थी। इसके बाद एसएसपी ने मामले की विभागीय जांच शुरू की। जांच में दोनों सिपाही दोषी पाए गए। सोमवार को पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर व उसके साथियों को पकड़ लिया। कुछ देर बाद पुलिस ने आरोपी सिपाहियों को भी गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से लूट की रकम में से 25 हजार रुपये, .315 बोर का तमंचा, कारतूस, दो मोबाइल फोन और घटना में इस्तेमाल बाइक मिली है। इसके अलावा 37 ऐसी गड्डियां बरामद हुई हैं, जिनके ऊपर 100, 200 और 500 रुपये के असली नोट लगे थे और अंदर नकली नोट थे। आरोपी ने बताया कि इन गड्डियों का इस्तेमाल लोगों को रुपये दोगुने करने का झांसा देकर ठगी करने में किया जाता था।
चार महीने पहले हुई थी दोनों सिपाहियों की तैनाती
दोनों सिपाही प्रसन्नजीत व आशीष की चार महीने पहले ही भावनपुर थाने में पोस्टिंग हुई थी। उनकी मुलाकात दो महीने पहले हिस्ट्रीशीटर साजिद से हुई थी। हिस्ट्रीशीटर ने दोनों सिपाहियों को कम समय में दोगुना पैसे कमाने का लालच दिया था। दोनों आरोपी सिपाही थाना प्रभारी निरीक्षक प्रताप सिंह की नाक के नीचे ही गलत काम कर रहे थे। दोनों सिपाहियों का काम हिस्ट्रीशीटर द्वारा धोखाधड़ी का शिकार पीड़ितों को डराने-धमकाने का था। एसएसपी ने दोनों सिपाहियों के करीबी पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच शुरू कर दी है।
हिस्ट्रीशीटर की संपत्ति की होगी जांच
हिस्ट्रीशीटर साजिद लोगों को पुलिस का डर दिखाकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी कर चुका है। चार महीने में उसने दोनों सिपाहियों के साथ मिलकर पीड़ितों को जेल भेजने का डर दिखाकर धोखाधड़ी की है। पुलिस हिस्ट्रीशीटर की अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की भी जांच करेगी। सीओ सदर देहात सुधीर सिंह ने बताया कि आरोपी की संपत्ति की जांच के बाद एसएसपी को जानकारी दी जाएगी। उसके बाद उसकी अवैध संपत्ति पर कार्रवाई की जाएगी।