विभागीय आंकड़ों के मुताबिक सदर, मुहम्मदाबाद गोहना, घोसी और मधुबन तहसील में 20 हजार 317 प्रमाणपत्र अटके हैं। सबसे खराब हाल सदर तहसील का है। यहां अकेले 10 हजार प्रमाणपत्र लंबित हैं। मुहम्मदाबाद गोहना तहसील में 731 जाति प्रमाणपत्र, 962 आय प्रमाणपत्र और 725 निवास प्रमाणपत्र शामिल हैं। घोसी तहसील में 961 जाति प्रमाणपत्र, 961 आय और 678 निवास प्रमाणपत्र हैं।
इसी तरह मधुबन तहसील में मधुबन आय प्रमाणपत्र 2070, जाति 1412 और निवास प्रमाणपत्र 1034 लंबित हैं। सदर तहसील में 4629 आय प्रमाणपत्र, 2955 जाति प्रमाणपत्र, 2974 निवास और 325 ईडब्ल्यूएस लंबित है। ये सभी फाइलें जांच के लिए संबंधित लेखपालों को भेजी गई थीं, लेकिन हड़ताल का हवाला देकर लेखपालों ने इन्हें बिना जांच के ही वापस कर दिया है।
हड़ताल से प्रभावित होने वाले कार्य
वरासत, अंश निर्धारण, फार्मर रजिस्ट्री, खतौनी या राजस्व रिकॉर्ड में नाम सुधार और अंश सुधार से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ओलावृष्टि, बाढ़ या सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं में फसलों के नुकसान का आकलन और रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाएगी। आय, जाति, निवास, ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र नहीं जारी होंगे। जन्म प्रमाणपत्र नहीं बनेंगे।
लोग बोले
- 20 दिन पहले अपने बेटे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। कई जगहों से पूछताछ के बाद तहसील स्तर पर अटक गया है। 22 सितंबर से लेखपालों के कार्य बहिष्कार के कारण प्रमाणपत्र नहीं बन पाने से बेटे का आधारकार्ड नहीं बन पा रहा है। इससे स्कूल में प्रवेश लेने में दिक्कत आ रही है। -सुमंत सिंह, निवासी हिंडोला
- पोता एक साल पहले हुआ था। उसके जन्म प्रमाणपत्र के लिए 26 दिन पहले आवेदन किया था। लगभग दो सप्ताह में प्रमाणपत्र बन जाना चाहिए, लेकिन अभी तक नहीं बन पाया है। -दुर्ग विजय राजभर, निवासी कमालपुर पहाड़पुर
- लेखपाल संघ से वार्ता चल रही है। शुक्रवार को जिलाध्यक्ष और तहसील अध्यक्षों से बातचीत करके हड़ताल समाप्त करने के लिए कहा जाएगा। जल्द ही समस्या सुलझा ली जाएगी। -प्रविंद्र कुमार, एडीएम, मऊ
संघ के अध्यक्ष बोले- खराब हो चुके हैं मोबाइल
लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष राहुल बाबा, सदर तहसील अध्यक्ष वैभव सिंह, मुहम्मदाबाद गोहना अध्यक्ष अनिल यादव, घोसी तहसील अध्यक्ष अरविंद पांडेय और मधुबन के तहसील अध्यक्ष शरद यादव ने बताया कि लेखपालों को वर्ष 2018 और 2020 तक मोबाइल दिया गया था, जो काफी पुराना हो गया है। इसके हैंग होने से काम करने में देरी होती है। एक आवेदन सत्यापन करने में लगभग 10 मिनट का समय लग जाता है। इसी तरह लैपटॉप भी पुराने हो गए हैं। यही कारण है कि बृहस्पतिवार को लेखपालों ने सभी ऑफीशियल व्हाट्सअप ग्रुप छोड़ दिए हैं। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी चरणबद्ध हड़ताल जारी रहेगी।