छह माह से कर रहे थे प्लानिंग
विनीत से छिपाकर सुब्रत और शालू विशाल से घर के काम कराया कराते थे। सुब्रत ने बताया कि विशाल पर भी कर्ज था इसलिए उन दोनों करीब छह माह से पापा को रास्ते से हटाने की प्लानिंग कर रहे थे। पहले एक्सीडेंट कर मारने की साजिश रची थी, लेकिन विशाल ने मना कर दिया।
विशाल को चाकू लाना महंगा पड़ गया
इसके बाद घर के भीतर ही तकिया से मुंह दबाकर हत्या की साजिश रची, ताकि परिवार को हार्ट अटैक बताकर मामले को रफा-दफा किया जा सके। सुब्रत का कहना है कि विशाल को चाकू लाना महंगा पड़ गया और पापा ने जब दोनों को कमरे में देख लिया, तो बिना कुछ सोचे समझे उन्होंने ताबड़तोड़ प्रहार कर दिए।
शालू का नाम लेकर सारी कहानी पलट दी
जब वह अपने कमरे में शालू के साथ पहुंचा, तो खून से सना शव देख उसे लगा कि अब वह नहीं बचेगा। पुलिस जब पूछताछ कर रही थी…तो यकीन हो गया था कि उसका जेल जाना तय है , लेकिन विशाल ने ऐन वक्त पर शालू का नाम लेकर सारी कहानी पलट दी। शालू को पुलिस ने पकड़ा, तो उसे यह भी संदेह हुआ कि कहीं पुलिस शालू के साथ उसे भी साजिश में शामिल न कर दे। यही वजह थी कि वह जेल में एक बार भी शालू से मिलने नहीं गया।
पिता पर बहू को बैड टच का आरोप, शालू ने नकारा
पुलिस हिरासत में पिता की अय्याशी का जिक्र करते हुए सुब्रत ने बताया कि पापा की नीयत तो शालू के लिए भी ठीक नहीं थी। कुछ दिन पहले कार से जब पापा शालू और बच्चे के साथ कहीं जा रहे थे तब पापा ने शालू को बैडटच किया था। इस पर सुब्रत के सामने ही बैठी शालू ने तुरंत नकारते हुए कहा कि बैडटच नहीं किया था बल्कि पापा का हाथ गलती से लग गया था। शालू का जवाब सुनकर सुब्रत सिर झुकाकर बैठा रहा।
नए नंबर से शालू से सात तो सुब्रत से की छह बार बात
पांच सितंबर की रात विनीत की हत्या हुई थी, जबकि तीन सितंबर को ही विशाल ने नया सिम खरीदा था। इस नए सिम से विशाल ने सबसे पहला फोन सुब्रत को ही किया था। इससे भी शक की सुई सुब्रत पर जाकर टिक गई थी। नए सिम से विशाल ने शालू से सात तो सुब्रत से छह बार बात की।
शालू की चैट को छुआ तक नहीं था
शालू से अधिकतर बातें जन्माष्टमी की खरीदारी को लेकर ही की गई थी। पुलिस ने बताया कि वारदात के बाद ही विशाल ने पकड़े जाने पर शालू को फंसाने का मन बना लिया था। यही वजह थी कि उसने सुब्रत की चैट, तो अपने मोबाइल से डिलीट कर दी थी, लेकिन शालू की चैट को छुआ तक नहीं था।
बोला विशाल- भाभी बेकसूर, भइया को बचाने के लिए लिया था नाम
रिमांड के आखिरी में जब शालू, विशाल और सुब्रत तीनों को साथ बैठाकर पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो विशाल बोल पड़ा... भाभी (शालू) बेकसूर हैं। भइया (सुब्रत) को बचाने के लिए उसने भाभी का नाम लिया था। भइया के बहुत एहसान जो हैं उस पर। विशाल ने बताया कि फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी बनवाई तो जरूर गई थी लेकिन सुब्रत ने उन्हें प्रवेश करने के लिए असली ही चाबी थमाई थी।