बिजनौर। अस्पतालों द्वारा कंपनियों से सीधे खरीदी गई सस्ती संस्थागत दवाइयों को खुदरा मेडिकल स्टोरों पर बेचने के फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस दुरुपयोग से मरीजों को महंगी दवाएं मिल रही हैं और बाजार में भी दाम बढ़ रहे हैं।
औषधि निरीक्षक पीयूष शर्मा ने बताया कि संस्थागत आपूर्ति की दवाएं खुले बाजार में आम जनता को बेचने के लिए नहीं होती हैं। ये दवाएं सीधे अस्पतालों, नर्सिंग होम, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य बड़े संस्थानों को मरीजों के इलाज के लिए भारी छूट पर थोक में दी जाती हैं। कुछ अस्पताल इस नियम का गलत फायदा उठा रहे हैं। वे थोक में सस्ती दवाएं खरीदकर बाजार में मेडिकल स्टोरों पर बेच रहे हैं। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। बल्कि, बाजार में मरीजों को अधिक दाम पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ही अस्पतालों को ये निर्देश दिए गए हैं।
संस्थागत आपूर्ति वाली दवाओं पर संबंधित विनिर्माण फर्म या सीएफए (कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग एजेंट) को ''इंस्टीट्यूशनल सप्लाई'' अंकित करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, बिलिंग और आपूर्ति से संबंधित सभी विवरणों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दर्ज करना भी जरूरी है। इन नियमों का उद्देश्य दवाइयों के दुरुपयोग को रोकना है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सस्ती दवाएं केवल जरूरतमंद मरीजों तक ही पहुंचें।
वर्जन:
अस्पताल दवाई की संस्थागत आपूर्ति की आड़ में बाजार में दवाई बेच देते हैं। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों को इसका फायदा नहीं मिलता है। यही फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सभी को निर्देश जारी किए गए हैं।
....पीयूष शर्मा, औषधि निरीक्षक, बिजनौर