परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए बताया कि वीरेंद्र के लापता होने पर अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस के अनुसार, डीएनए जांच से पहचान की पुष्टि कराई जाएगी और शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
भरतपुर के नगला भवरा निवासी वीरेंद्र सिंह (38) की हत्या का शक उनके परिजन ने जताया है। पुलिस को शव 9 अक्तूबर को बिचपुरी में रेलवे लाइन किनारे मिला था। शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ने लावारिस मानकर अंतिम संस्कार भी कर दिया। सोमवार को मृतक के परिजन ने वीडियो देखकर पहचान की और अपना शक जताया।
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मृतक के पिता मंगल सिंह ने बताया कि वीरेंद्र के शव पर केवल अंडरवियर और बनियान थी, जबकि कपड़े कुछ दूरी पर मिले थे। वीरेंद्र 7 अक्तूबर को अपनी बहन प्रियंका के भरतपुर स्थित प्रिंस नगर आवास से इलेक्ट्रिक स्कूटी की मरम्मत कराने अन्नू मोटर्स गया था। स्कूटी दुकान पर छोड़ने के बाद वह पैदल सर्कुलर रोड की ओर चला गया।
काफी देर तक वापस न लौटने पर परिजन ने मोबाइल पर फोन किया। एक महिला ने फोन उठाया और बताया कि मोबाइल उसे आरबीएम अस्पताल के पास एक खोखे के पीछे मिला है। परिजन ने मोबाइल ले लिया लेकिन वीरेंद्र का पता नहीं चला। 8 अक्तूबर को परिजन ने मथुरा गेट थाने में पुष्पेंद्र, मुकेश, रामवीर और राजवीर के खिलाफ अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई। प्राथमिकी के अनुसार, घटना से करीब आठ दिन पहले पुष्पेंद्र और राजवीर ने परिवार को धमकी दी थी।
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एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक की मौत कोमा में जाने के कारण हुई है। मृतक की शिनाख्त के लिए डीएनए जांच कराई जाएगी। डीएनए नमूना लिया गया है। इस जांच से परिजन से पहचान कराई जाएगी। परिजन की शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।