बिजलीघर मॉडल चौराहा बेतरतीब खड़े ऑटो-ई रिक्शा और बसों के कारण जाम का अड्डा बन गया है, जबकि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद यातायात व्यवस्था नहीं सुधर रही। आगरा किला, फोर्ट स्टेशन और छीपीटोला जाने वाले रास्तों पर भी वाहन खड़े रहने से राहगीरों और पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तत्कालीन पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गाैड ने बिजलीघर चाैराहे को माॅडल के रूप में विकसित किया मगर अब यह चाैराहा ऑटो-ई रिक्शा और बस स्टैंड बनकर रह गया है। पांच रास्तों पर जाने के लिए राहगीरों से लेकर निजी वाहन चालकों को जद्दोजहद करनी पड़ती है। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही से यहां वाहन बेतरतीब तरीके से खड़े होते हैं और लोगों को घंटों जाम का सामना करना पड़ता है।
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बिजलीघर की तरफ से मंटोला की तरफ के रास्ते पर ऑटो की लंबी लाइन राह चलते लोगों को परेशान करती है। चालक सवारियों को बैठाने के लिए बीच सड़क पर ही ऑटो खड़ा कर देते हैं। लोग बुलाने पर नहीं आते हैं तो उन्हें हाथ पकड़कर बैठाने का प्रयास करते हैं। आलम यह है कि पुलिसवाले सामने खड़े रहने के बावजूद कुछ नहीं बोलते। यह हाल मंटोला तक है।
दो साल पहले पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गाैड ने बिजलीघर सहित 10 चौराहों को मॉडल बनाने के लिए चयनित किया था। इसमें एक टीआई की ड्यूटी लगाई गई थी। यह देखा जाना था कि चौराहे पर अतिक्रमण और ऑटो स्टैंड पर कैसे रोक लगाई जा सकती है। स्मार्ट सिटी के कैमरों से चौराहे की व्यवस्था देखी जाती थी मगर कुछ दिन बाद ही यह व्यवस्था ठंडे बस्ते में चली गई।
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आगरा किला और स्टेशन मार्ग का बुरा हाल
दोपहर ढाई बजे आगरा किला की तरफ जाने वाले रास्ते पर पुलिस ने एक लेन पर बैरियर लगाया था। वहीं दूसरी लेन पर रोडवेज बस खड़ी हो गई। रही सही कसर ऑटो सड़क पर खड़े होकर पूरी कर रहे थे। रास्ते से निकल रहे देसी और विदेशी पर्यटकों को जगह नहीं बची। सामने ही बूथ पर तैनात यातायात पुलिस की महिला सिपाही बाइक पर बैठकर मोबाइल चला रही थीं। टीएसआई थे लेकिन वह यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए कोई इंतजाम नहीं कर रहे थे। यही हाल फोर्ट रेलवे स्टेशन का रहा। सड़क पर दोनों ओर खड़े ऑटो लोगों को पैदल निकलने में भी परेशानी का सबब बने रहे।
पुलिस चौकी के सामने ही ऑटो का जमावड़ा
बिजलीघर चौराहे से ही छीपीटोला की तरफ जा सकते हैं। यहां पर फोर्ट पुलिस चौकी भी है। इसके सामने ही ऑटो और ई-रिक्शा खड़े रहते हैं। इसके अलावा फलों की ठेलों से भी आसपास का रास्ता घिरा रहता है। इन पर कोई रोक-टोक नहीं है। चौराहे पर लगी ट्रैफिक लाइट भी खराब पड़ी हैं।
ट्रांसपोर्ट नगर में भी राह मुश्किल
अमित कुमार सिंह ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर में कई वर्कशॉप के बाहर वाहन खड़े रहते हैं। इससे जाम लगता है। आसपास कॉलोनी हैं। इनमें रहने वाले लोगों को रास्ते से निकलने में परेशानी होती है। स्कूली वाहन भी फंस जाते हैं। दोपहर में किसी ट्रक के आने पर रास्ता नहीं मिलता है। इन्हें खड़े कराने के लिए कोई पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। पुलिस से शिकायत के बाद भी समाधान नहीं हो रहा है।
आप भी दे सकते हैं जानकारी
अमर उजाला ने ऑपरेशन ट्रैफिक अभियान शुरू किया है। इसके तहत शहर के प्रमुख चौराहों पर टीम रोजाना पड़ताल करेगी। बिगड़ी हुई यातायात व्यवस्था को सामने लाएगी। इसके लिए अमर उजाला रिपोर्टर के मोबाइल नंबर 7906877703 पर व्हाट्सएप कर जानकारी दे सकते हैं।