हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व होता है। शक्ति उपासना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि आज यानी 11 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का त्योहार हर वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। जो नौ दिनों तक चलता है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठान के साथ पूजा होती है। नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि पर घरों में घटस्थापना होती है और इस दौरान मां दुर्गा की पूजा, अखंड ज्योति, दुर्गा सप्तशती का पाठ और दूसरे तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करना बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है क्योंकि इस दिन देवी दुर्गा नौ दिनों के लिए स्वर्गलोक से पृथ्वी पर वास करने के लिए आती हैं। माता दुर्गा की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और संपन्नता का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं 11 अक्तूबर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्रि की तिथि, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
राहुकाल में न करें कलश स्थापना
शास्त्रों के अनुसार राहुकाल में किसी भी तरह का शुभ काम या फिर पूजा करना शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे में शुभ और मांगलिक कार्यों को करने में राहुकाल में करने से बचना चाहिए। पंचांग के अनुसार, 11 अक्तूबर को राहुकाल शाम 4 बजकर 34 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 01 मिनट तक रहेगा। ऐसे में इस समय भूलकर भी कलश स्थापना न करें।
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
11 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहे हैं जो 10 अक्तूबर तक चलेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पर मां दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन हाथी पर होगा। मान्यताओं के अनुसार अगर नवरात्रि पर्व की शुरुआत रविवार के दिन से होती है मां दुर्गा हाथी पर आती हैं। हाथी पर सवार होकर मां दुर्गा के आगमन को बहुत ही शुभ, लाभकारी और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।