किसी इंसान का चेहरा सिर्फ उसकी पहचान नहीं होता, उसके पीछे यादों, डर, भावनाओं, संघर्ष और बीते वक्त की अनगिनत कहानियां छिपी होती हैं। जयपुर में लगी कला प्रदर्शनी ‘Traces of Time...the Lived Life’ इन्हीं अनकही कहानियों को रंगों और आकृतियों के जरिए सामने ला रही है। प्रदर्शनी में मिस्र के चर्चित चित्रकार मोहम्मद अबुएलनागा की कृतियां दर्शकों को इंसानी चेहरे के पीछे छिपी उस दुनिया से रूबरू करा रही हैं, जो आमतौर पर दिखाई नहीं देती।
चेहरे के पीछे छिपे इंसान की तलाश
मोहम्मद अबुएलनागा के प्रोजेक्ट ‘Each of Us Carries a God Within’ में पोर्ट्रेट कला केंद्र में है, लेकिन कलाकार का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति की शक्ल को कैनवास पर उतारना नहीं है। वह उस इंसान को तलाशने की कोशिश करते हैं, जो चेहरे के पीछे कहीं छिपा रहता है।
उनकी पेंटिंग्स में कहीं ताकत नजर आती है तो कहीं कमजोरी। किसी कृति में आध्यात्मिकता का अहसास होता है तो किसी में रोजमर्रा की जिंदगी की बेचैनी और असुरक्षा दिखाई देती है। कलाकार के लिए यही विरोधाभास इंसान की वास्तविक पहचान का हिस्सा हैं। अबुएलनागा का मानना है कि चेहरा अपने साथ यादें, डर और समय के निशान लेकर चलता है। उनकी कला इन्हीं निशानों को पढ़ने और उनके पीछे छिपी कहानी को समझने की कोशिश करती है।
प्राचीन मिस्र से आज के इंसान तक का सफर
अबुएलनागा के चित्रों में कई चेहरे ऐसे दिखाई देते हैं, मानो वे किसी प्राचीन सभ्यता से निकलकर आज के दौर में चले आए हों। उनकी कृतियों में प्राचीन मिस्र की सभ्यता और देवी-देवताओं की आकृतियों की झलक मिलती है।
कैनवास पर दिखाई देती है अनकही कहानी
अबुएलनागा की कृतियां दर्शकों को यह सोचने के लिए मजबूर करती हैं कि किसी चेहरे को देखकर हम वास्तव में उसके बारे में कितना जान पाते हैं। दुनिया को दिखाई देने वाले चेहरे के पीछे भावनाओं, अनुभवों और संघर्षों की पूरी दुनिया छिपी हो सकती है। उनकी पेंटिंग्स इसी दिखाई देने और छिपे रहने के बीच की दूरी को तलाशती हैं। यादें, डर, कमजोरी, आध्यात्मिकता और पहचान जैसे भाव उनके चित्रों में एक साथ मौजूद दिखाई देते हैं।
प्रदर्शनी में अलग-अलग रंगों में दिखा मानवीय जीवन
‘Traces of Time...the Lived Life’ में शामिल दूसरे कलाकार भी मानवीय जीवन को अपने-अपने नजरिए से देखते हैं। पीएन चोयल की कृतियां शक्ति और गति को अभिव्यक्त करती हैं, जबकि आकाश चोयल मल्टीमीडिया के माध्यम से सपने और वास्तविकता के बीच की सीमा को तलाशते हैं। जय झरोटिया की मिश्रित माध्यम वाली कृतियों में मानवीय अस्तित्व पर काव्यात्मक टिप्पणी दिखाई देती है। वहीं सुब्रतो मंडल रिश्तों, पहचान और उम्मीद की तलाश को अपनी कला के जरिए सामने रखते हैं। संत कुमार रोजमर्रा की जिंदगी में बदलते भावों और मनोदशाओं को अपनी कला का विषय बनाते हैं। वहीं प्रदर्शनी में शामिल अन्य कलाकारों की कृतियां भी मानवीय अनुभवों के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं।
सिर्फ प्रदर्शनी नहीं, इंसान को समझने की कोशिश
इस तरह ‘Traces of Time...the Lived Life’ सिर्फ कला कृतियों को देखने का अवसर नहीं देती, बल्कि इंसान को उसके बाहरी चेहरे से आगे जाकर समझने की कोशिश भी करती है। रंगों, आकृतियों और अलग-अलग कलात्मक माध्यमों के जरिए प्रदर्शनी यह सवाल सामने रखती है कि किसी व्यक्ति के चेहरे पर दिखाई देने वाली कहानी के पीछे आखिर कितनी अनकही दुनिया छिपी हो सकती है।