राजस्थान के भरतपुर जिले में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की मौत के पीछे माइनिंग लीज और क्रेशर प्लांट तक जाने के रास्ते को लेकर दो साल से चल रहा विवाद सामने आया है। भौंडा और रायपुर गांव के ग्रामीण लंबे समय से खनन गतिविधियों का विरोध कर रहे थे। रविवार शाम क्रेशर प्लांट दोबारा शुरू करने की कोशिश के दौरान विवाद हिंसक हो गया। भीड़ के हमले में गंभीर घायल भड़ाना ने जयपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया।
चरागाह भूमि से रास्ता निकालने पर थी ग्रामीणों की आपत्ति
भड़ाना की माइनिंग लीज और क्रेशर प्लांट भौंडा गांव के पास पहाड़ी क्षेत्र में है। लीज उनकी पत्नी कमलेश भड़ाना के नाम पर बताई गई है। भौंडा और रायपुर गांव के ग्रामीण करीब दो साल से खनन और क्रेशर प्लांट का विरोध कर रहे थे। ग्रामीणों का आरोप था कि खनन से जुड़े वाहनों की आवाजाही के लिए ग्राम पंचायत की चरागाह भूमि का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने कई बार धरना दिया और माइनिंग लीज तक जाने वाला रास्ता भी रोका।
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दो साल से बंद था क्रेशर प्लांट
विरोध के चलते क्रेशर प्लांट करीब दो साल से बंद था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत से प्लांट चलाने की अनुमति मिलने के बाद रविवार को इसे दोबारा शुरू करने की कोशिश की गई। इसी दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मारपीट शुरू हो गई।
हमले में सुरक्षाकर्मी भी घायल
टकराव के दौरान अतर सिंह भड़ाना और उनके सुरक्षाकर्मी गगन शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए। भड़ाना को वैर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से हालत नाजुक होने पर उन्हें जयपुर रेफर किया गया, लेकिन दौसा के पास रास्ते में उनकी मौत हो गई। सुरक्षाकर्मी गगन शर्मा को भरतपुर के राज बहादुर मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी
वैर थाना पुलिस के अनुसार, ग्रामीणों और क्रेशर प्लांट संचालक पक्ष के बीच टकराव की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। घटना में शामिल लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। ग्रामीणों की ओर से चरागाह भूमि और रास्ते को लेकर लगाए गए आरोपों तथा हिंसक घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। अतर सिंह भड़ाना वर्ष 2003 से 2008 तक बयाना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रहे थे। इस घटना ने दो साल से चल रहे खनन विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।